भौतिकी में भारत का वैश्विक गौरव: जानिए उस रिसर्च के बारे में जिसने वैज्ञानिक दीपक धर को दिलाया दुनिया का प्रतिष्ठित ‘डिराक मेडल’
सरिता त्रिपाठी/ नई दिल्ली / पुणे: भारतीय विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र के लिए यह एक बेहद गर्व का विषय है कि जाने-माने भौतिक विज्ञानी (Physicist) प्रोफेसर दीपक धर को सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक ‘डिराक मेडल’ (Dirac Medal) से सम्मानित किया गया है। वे इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। लेकिन आम जनता के मन में यह सवाल है कि आखिर उनकी वह कौन सी रिसर्च थी, जिसने उन्हें इस वैश्विक मुकाम तक पहुंचाया?
डिराक मेडल, जिसे सैद्धांतिक भौतिकी (Theoretical Physics) के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के समकक्ष माना जाता है, इटली स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) द्वारा प्रदान किया जाता है। प्रोफेसर धर को यह सम्मान ‘स्टैटिस्टिकल फिजिक्स’ (सांख्यिकीय भौतिकी) के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए दिया गया है।
सरल शब्दों में समझें तो, प्रोफेसर धर का काम मुख्य रूप से ‘फ्रैक्टल्स’ (Fractals) और रैंडम सिस्टम्स के इर्द-गिर्द घूमता है। फ्रैक्टल्स ऐसी जटिल ज्यामितीय आकृतियां होती हैं, जिनका हर छोटा हिस्सा उनके बड़े हिस्से के बिल्कुल समान दिखता है (जैसे बर्फ का एक टुकड़ा या गोभी का फूल)। उन्होंने अपनी रिसर्च से यह समझाया है कि कैसे प्रकृति में अव्यवस्थित (Random) दिखने वाली प्रणालियां भी एक गहरे गणितीय और भौतिक नियम का पालन करती हैं।
उनका काम केवल ब्लैकबोर्ड के समीकरणों तक सीमित नहीं है। उनके द्वारा विकसित किए गए मॉडल्स का उपयोग आज दुनिया भर के वैज्ञानिक यह समझने के लिए करते हैं कि जंगल की आग (Forest fires) कैसे फैलती है, चुंबक (Magnets) कैसे काम करते हैं, और यहां तक कि शेयर बाज़ार में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव क्यों आते हैं। प्रोफेसर दीपक धर की यह उपलब्धि भारत में विज्ञान की पढ़ाई कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो यह साबित करती है कि भारतीय दिमाग आज भी बुनियादी विज्ञान (Fundamental Science) के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है।