कावेरी जल विवाद में नया मोड़
CWMA ने कर्नाटक को दिया तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक रोज़ाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश
अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली / बेंगलुरु: दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों, कर्नाटक और तमिलनाडु, के बीच दशकों पुराना कावेरी जल विवाद एक बार फिर गहरा गया है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) के उस निर्देश का कड़ाई से समर्थन किया है, जिसमें कर्नाटक सरकार को अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोज़ाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया गया है। इस आदेश के बाद कर्नाटक की राजनीति और किसान संगठनों में भारी हलचल मच गई है।
CWMA के अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कर्नाटक वर्तमान में इस आदेश का पालन करने के लिए एक “आरामदायक स्थिति” (Comfortable position) में है, जिसका अर्थ है कि राज्य के बांधों में पर्याप्त पानी मौजूद है। हालांकि, कर्नाटक सरकार इस आदेश को लेकर सतर्क है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राज्य सरकार बांधों में पानी की वास्तविक उपलब्धता का सावधानीपूर्वक आकलन करने के बाद ही अपनी अगली कार्रवाई पर कोई ठोस फैसला लेगी।
कर्नाटक के किसान और कई स्थानीय संगठन तमिलनाडु को पानी दिए जाने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बारिश की कमी के कारण उनके पास पहले से ही सिंचाई और पीने के पानी का संकट है। दूसरी ओर, तमिलनाडु का कहना है कि उसे अपने कावेरी डेल्टा क्षेत्र में खड़ी फसलों को बचाने के लिए इस पानी की सख्त ज़रूरत है। अब सभी की नज़रें कर्नाटक सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस आदेश का पालन करती है या फिर कानूनी और राजनीतिक रास्तों का सहारा लेती है।