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अमेरिकी विदेश नीति में बड़ा यू-टर्न: अन्य रणनीतियां विफल होने के बाद ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों की ओर वापस लौटे ट्रंप

राघवेंद्र प्रताप सिंह/वाशिंगटन डीसी:अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति में अमेरिका ने एक बार फिर अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के खिलाफ फिर से सख्त आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) का सहारा लेने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का यह रुख तब सामने आया है जब ईरान के साथ तनाव खत्म करने की उनकी अन्य सभी रणनीतियां और कूटनीतिक बातचीत या तो ठंडे बस्ते में चली गई हैं या विफल साबित हुई हैं।

सूत्रों का कहना है कि यह रणनीतिक बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका के पास प्रमुख हथियारों के भंडार कम हो रहे हैं और ईरान के साथ रुक-रुक कर चल रही बातचीत (Stop-start talks) पूरी तरह से ठप हो गई है। सैन्य कार्रवाई या सीधे टकराव के विकल्प सीमित होने के कारण, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाकर ही उसे घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयानों में इस बात पर ज़ोर दिया है कि ईरान पर ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति ही अंततः एक बड़ी कूटनीतिक सफलता (Breakthrough) का रास्ता खोलेगी। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से ईरान में आम जनता की मुश्किलें तो बढ़ेंगी, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि इससे ईरान का नेतृत्व अपने परमाणु कार्यक्रम या क्षेत्रीय रणनीतियों से पीछे हट जाए। इस फैसले से वैश्विक तेल बाज़ार और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।