Trending

हंगामे के बीच विधायी कार्य: लोकसभा में भारी गतिरोध के बावजूद बिना बहस के पारित हुए केरल का नाम बदलने और सहकारी क्षेत्र के बिल

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: संसद के मौजूदा मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा भारी गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, इस लगातार हंगामे के बीच भी सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफल रही है। 11 अगस्त 2026 को, लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच केरल का नाम बदलने से जुड़ा बिल और सहकारी क्षेत्र के विकास से संबंधित बिल बिना किसी बहस के (without debate) पारित कर दिए गए।

सदन की कार्यवाही के दौरान, ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ और ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सरकार की ओर से पेश किया गया। इन महत्वपूर्ण विधेयकों को क्रमशः गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सदन के पटल पर रखा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों की ज़ोरदार नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही का संचालन किया।

विपक्षी दलों ने सरकार की इस कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की है। उनका आरोप है कि अहम विधेयकों, विशेष रूप से राज्यों के नाम परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर, बिना किसी लोकतांत्रिक बहस और चर्चा के मुहर लगाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का तर्क है कि विपक्ष जानबूझकर जनहित के कार्यों में बाधा डाल रहा है, जिसके कारण बिलों को शोरगुल के बीच पारित कराना सरकार की मजबूरी बन गया है। केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की राज्य की लंबे समय से लंबित मांग अब इस बिल के ज़रिए पूरी होने जा रही है।