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क्या बाइक टैक्सियों पर लगेगा प्रतिबंध? कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- ‘बाइक टैक्सी सार्वजनिक परिवहन वाहन नहीं हैं’

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली / बेंगलुरु: देश के कई बड़े शहरों में परिवहन का एक सस्ता और सुलभ माध्यम बन चुकी ‘बाइक टैक्सियों’ के भविष्य पर एक बड़ी कानूनी बहस छिड़ गई है। कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक अहम मामले में अपना रुख पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए कहा है कि बाइक टैक्सी (Bike Taxis) सार्वजनिक परिवहन वाहन (public transport vehicles) नहीं हैं। राज्य सरकार की इस दलील से ऐप-आधारित दोपहिया टैक्सी सेवा प्रदाताओं को बड़ा झटका लग सकता है।

कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील संचित गर्ग ने शीर्ष अदालत में दलील दी कि दोपहिया वाहनों को टैक्सी के रूप में उपयोग करने पर लगाया गया प्रतिबंध पूरी तरह से उचित, आनुपातिक और जनहित में है। राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि कानूनी ढांचा स्पष्ट रूप से विचार करता है कि परमिट देना कोई स्वचालित (automatic) प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा (public safety), वाहन की उपयुक्तता और विनियामक तैयारियों के आधार पर जांच के अधीन है।

जबकि कर्नाटक सरकार सुरक्षा और नियमों का हवाला देकर इन पर प्रतिबंध लगा रही है, देश के अन्य हिस्सों में स्थिति बिल्कुल अलग है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में रैपिडो जैसी राइड-शेयरिंग बाइक टैक्सी सेवाएं आम जनजीवन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, जिनका इस्तेमाल लोग न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों के बीच यात्रा करने के लिए भी धड़ल्ले से कर रहे हैं। एक तरफ जहां यह युवाओं के लिए रोज़गार का साधन है, वहीं राज्य सरकारें इसे यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा मान रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या ऐतिहासिक फैसला सुनाता है, जो पूरे देश में बाइक टैक्सियों का भविष्य तय करेगा।