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उज्ज्वला योजना का ज़मीनी कड़वा सच: कर्नाटक में 5 सालों में 107% बढ़े ‘निल-रिफिल’ उपभोक्ता, रसोई गैस की महंगाई बनी बड़ी वजह

इंडियन व्यू टीम/ बेंगलुरु: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जो देश में रसोई गैस (LPG) की कीमतों और गरीब परिवारों की क्रय शक्ति (Purchasing power) पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में उज्ज्वला योजना के उन लाभार्थियों की संख्या में 107 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, जिन्होंने कनेक्शन मिलने के बाद एक साल में एक बार भी सिलिंडर रिफिल (Nil Refill) नहीं कराया है।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में कर्नाटक में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 1.64 लाख थी, जो वर्ष 2025-26 तक बढ़कर 3.40 लाख के पार पहुंच गई है। यानी इन गरीबों के पास गैस चूल्हा और सिलिंडर तो है, लेकिन सिलिंडर की ऊंची कीमतों के कारण उनके पास दोबारा रिफिल कराने के पैसे नहीं हैं। नतीजतन, ये परिवार एक बार फिर धुएं और लकड़ी-उपले के पारंपरिक चूल्हे की ओर लौटने पर मजबूर हैं।

संसदीय प्रतिनिधियों और अर्थशास्त्रियों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार का ध्यान अब केवल ‘मुफ्त कनेक्शन बांटने’ के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गरीब परिवार सिलिंडर रिफिल कराने में सक्षम हो सकें। रिपोर्ट में मांग की गई है कि निम्न-आय वर्ग के परिवारों के लिए एलपीजी सब्सिडी को और बढ़ाया जाए ताकि रसोई गैस उनके लिए किफायती बनी रहे।