Trending

SC/ST पीड़ितों के पुनर्वास के लिए नया खाका: टास्क फोर्स ने की नियमों में संशोधन और बेहतर राहत की सिफारिश, जानें क्या हैं नए प्रस्ताव

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: देश में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के मामलों में पीड़ितों को न्याय और उचित पुनर्वास दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता सचिव (Secretary, Social Justice and Empowerment) की अध्यक्षता में गठित एक विशेष टास्क फोर्स ने SC/ST पीड़ितों के लिए राहत और काउंसलिंग (counselling) सुविधाओं को बढ़ाने की मांग की है।

इस उच्च स्तरीय टास्क फोर्स ने मौजूदा ढांचे की समीक्षा करने के बाद ‘SC/ST अधिनियम’ के तहत बनाए गए नियमों (Rules framed under the SC/ST Act) में कई अहम संशोधनों का सुझाव दिया है। इन सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित न रहकर, पीड़ितों के मानसिक और आर्थिक पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करना है। टास्क फोर्स की प्रमुख सिफारिशों में ज़मीनी स्तर पर विशेष ‘राहत और पुनर्वास सेल’ (relief and rehabilitation cells) की स्थापना करना शामिल है, जो सीधे तौर पर पीड़ितों को सहायता प्रदान करेंगे।

इसके समानांतर, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes – NCST) ने भी अत्याचार अधिनियम (Atrocities Act) में अलग से कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों का सुझाव दिया है। आयोग का मुख्य ध्यान अनुसूचित जनजाति समुदायों की आजीविका की रक्षा करने वाले प्रावधानों को पेश करने पर है। NCST ने विशेष रूप से उन आदिवासी समुदायों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की है, जिन्हें उनकी पुश्तैनी ज़मीनों से बेदखल (alienated from their land) कर दिया गया है।

अक्सर यह देखा गया है कि अपनी ज़मीन वापस पाने के लिए इन गरीब और संसाधनहीन आदिवासी परिवारों को दशकों तक अदालती लड़ाई (prolonged court battles) लड़नी पड़ती है, जिससे उनकी आजीविका पूरी तरह से नष्ट हो जाती है। आयोग की सिफारिश है कि ऐसे मामलों में कानून के भीतर ही आजीविका सुरक्षा की ठोस गारंटी होनी चाहिए। यदि सरकार इन सिफारिशों को मंज़ूरी देती है, तो यह देश के सबसे कमज़ोर वर्गों के मानवाधिकारों और उनके आर्थिक अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा।