कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास ने केंद्र सरकार पर बोला हमला: लोकसभा में युवाओं से जुड़े सवाल नहीं पूछने देने पर उठाए गंभीर सवाल

New Delhi : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संस्थापक और प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में युवाओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को पूछने की अनुमति नहीं दी गई. सौरव दास के मुताबिक, इन सवालों में नीट-यूजी (NEET-UG) की फीस वापसी और देश के युवाओं का सरकार पर घटता भरोसा जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे शामिल थे.लोकसभा सांसद ने भेजे थे गृह और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सवालसौरव दास ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि लोकसभा सांसद मैथेश्वरन वीएस ने सरकार से जवाब मांगने के लिए तीन बार सवाल भेजे थे, जो मुख्य रूप से गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से संबंधित थे. इन सवालों के आधिकारिक नोटिस नंबर 101799 और 101801 थे.इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से निम्नलिखित सवाल शामिल किए गए थे:नीट-यूजी 2026 परीक्षा का आवेदन शुल्क वापस करने को लेकर सरकार का क्या निर्णय है?देश के युवाओं का सरकार पर से लगातार भरोसा क्यों कम हो रहा है?दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी और जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं मुहैया कराई गईं?प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से सरकार ने अब तक क्या बातचीत की है?छात्रों की समस्याओं, पेपर लीक के मामलों और संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है?शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के साथ किस तरह का व्यवहार किया गया?नियम 41(2) का हवाला देकर सवाल रोके जाने पर खड़े किए सवालसौरव दास ने दावा किया कि इन सभी जायज और जनहित से जुड़े सवालों को लोकसभा में पूछने की अनुमति नहीं दी गई और इसके लिए नियम 41(2) की विभिन्न धाराओं (I, IV, V, XVIII और XXII) का हवाला दिया गया. उन्होंने इन कारणों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इन्हें ‘बेहद अजीब’ बताया. उन्होंने सवाल किया कि यदि संसद के पटल पर ऐसे सवाल नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार की जवाबदेही आखिर कहां और कैसे तय होगी? क्या सरकार से जवाब मांगने के लिए युवाओं को सड़कों पर ही उतरना पड़ेगा? उन्होंने यह भी पूछा कि उन अहम हफ्तों के दौरान गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवालों के जवाब संसद में क्यों नहीं दिए गए?“संसद को सिर्फ मुहर लगाने वाली जगह नहीं बनाया जा सकता”सपा या किसी अन्य दल के इतर कड़ा रुख अपनाते हुए सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी सांसद का सरकार से सवाल पूछना केवल एक औपचारिक संसदीय प्रक्रिया भर नहीं है, बल्कि यह हमारे संसदीय लोकतंत्र का सबसे अहम और बुनियादी स्तंभ है. प्रश्नकाल का मुख्य उद्देश्य ही यह होता है कि जनता से जुड़ी अपार ताकतों वाले मंत्री, जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के सवालों के प्रति जवाबदेह हों. यदि ऐसा नहीं होगा, तो लोगों का लोकतंत्र से मोहभंग होगा और उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा.उन्होंने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आप संसद की मुखर आवाज को दबाकर उसे अपनी अधूरी और मनमानी नीतियों पर सिर्फ मुहर लगाने वाली जगह में तब्दील नहीं कर सकते. देश के युवाओं को इस तरह लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हमारा लोकतांत्रिक भारत है.