राम मंदिर दान चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जांच से बनाई दूरी, कहा- ‘गेंद अब SIT के पाले में है’

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन से जुड़े दान में कथित चोरी के संवेदनशील मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राम मंदिर दान चोरी मामले में अब गेंद विशेष जांच दल (SIT) के पाले में है। अदालत ने इस मामले की जांच में फिलहाल सीधा हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जांच के प्रति एक ‘हैंड्स-ऑफ अप्रोच’ (हस्तक्षेप न करने का दृष्टिकोण) व्यक्त किया है। इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं और जांच की मांग पर सुनवाई के दौरान, पीठ ने जांच एजेंसी की स्वायत्तता और प्रक्रिया पर भरोसा जताया। पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अगर विशेष जांच दल (SIT) अपना काम संतोषजनक ढंग से कर रहा है, तो यह बहुत अच्छी बात है।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी विकल्प खुले हैं। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने आगे कहा कि अगर जांच में कुछ और आवश्यकता होती है, तो अदालत इसमें हस्तक्षेप करेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि सुप्रीम कोर्ट SIT की जांच की प्रगति पर नज़र बनाए हुए है और ज़रूरत पड़ने पर उचित आदेश पारित कर सकता है।
दान से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और संबंधित पक्षों को एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले से जुड़े किसी भी प्रकार के सुझाव सीधे सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) के कार्यालय को भेजे जा सकते हैं। राम मंदिर आस्था का एक बड़ा केंद्र है, ऐसे में दान से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता की खबर समाज में गहरी चिंता पैदा करती है। सर्वोच्च अदालत का यह रुख दर्शाता है कि वह इस मामले में एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के पक्ष में है।