कर्नाटक वन क्षेत्र में 3 तमिलों की मौत: घटना ने ताज़ा की आंध्र प्रदेश में 20 तमिल लकड़हारों की हत्या की भयावह यादें

सरिता त्रिपाठी/ चेन्नई / बेंगलुरु: हाल ही में 15 अगस्त 2026 को कर्नाटक के वन अधिकारियों द्वारा तीन तमिलों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। कर्नाटक के जंगलों में हुई इस ताज़ा घटना ने एक बार फिर पड़ोसी राज्यों के बीच सीमांत क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों और वन विभाग के टकराव की दुखद दास्तानों को सामने ला दिया है।
इस घटना ने कई साल पहले हुए एक ऐसे ही खौफनाक एनकाउंटर की दर्दनाक यादें ताज़ा कर दी हैं। 7 अप्रैल 2015 को, तमिलनाडु के 20 लकड़हारों की आंध्र प्रदेश की ‘रेड सैंडर्स एंटी-स्मगलिंग टास्कफोर्स’ (लाल चंदन तस्करी निरोधी कार्यबल) की एक टीम द्वारा बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह खौफनाक गोलीबारी तिरुमाला पहाड़ियों की तलहटी में स्थित शेषाचलम वन क्षेत्र में हुई थी।
2015 की उस घटना के बाद, 8 अप्रैल 2015 को तिरुवन्नामलाई ज़िले के मुरुगपडी गांव में शेषाचलम एनकाउंटर के पीड़ितों के परिजनों ने भारी दुख और शोक व्यक्त किया था। उस समय भी मानवाधिकार संगठनों ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए कड़ी जांच की मांग की थी।
अब एक दशक बाद, कर्नाटक के वन रक्षकों द्वारा 3 तमिलों की हत्या ने उसी बहस को फिर से ज़िंदा कर दिया है। अक्सर सीमावर्ती इलाकों के गरीब मज़दूर तस्करी के बड़े सरगनाओं के जाल में फंस जाते हैं और अंततः उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर एक बार फिर यह मांग उठ रही है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक पारदर्शी और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों की जान न जाए।