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कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी नज़र: अदालत ने तमिलनाडु से कहा- ‘पानी दिया जा रहा है’, नई स्टेटस रिपोर्ट तलब की

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली / चेन्नई: दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों—कर्नाटक और तमिलनाडु—के बीच दशकों से चले आ रहे कावेरी जल बंटवारे के मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अहम निर्देश दिए हैं। कावेरी जल विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है कि वह पानी के बंटवारे की प्रगति की निगरानी करेगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने तमिलनाडु सरकार को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य को पानी दिया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह दोनों राज्यों के बीच जल प्रवाह की प्रगति पर नज़र रखेगी और साथ ही अधिकारियों से इस मामले में एक नई स्टेटस रिपोर्ट (Fresh Status Report) भी मांगी है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की है।

इस कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु सरकार की वह याचिका है जिसमें उसने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी। तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाते हुए मांग की थी कि अदालत कर्नाटक को 21.357 टीएमसी (TMC) पानी की शेष मात्रा छोड़ने का निर्देश दे। तमिलनाडु के अनुसार, पानी की यह मात्रा 12 अगस्त तक कर्नाटक द्वारा देय थी।

कावेरी नदी का पानी दोनों राज्यों के किसानों और आम जनता के लिए जीवन रेखा है। कम बारिश और सूखे के समय यह विवाद और भी गहरा हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा रुख यह दर्शाता है कि अदालत जल बंटवारे से जुड़े प्राधिकरणों के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहती है ताकि दोनों राज्यों के बीच संतुलन बना रहे और किसानों को समय पर पानी मिल सके।