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झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द होने पर उबाल: पास करने वाले छात्र हुए भावुक, बोले- ‘एक पल में हम बेरोजगार हो गए’

रांची : झारखंड में स्टूडेंट प्रोटेस्ट और छात्रों के दबाव के आगे हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 2014 से लेकर अब तक टीपीडीएल (TDPL) द्वारा आयोजित कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से जहां एक तरफ परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों और देवेंद्र महतो जैसे नेताओं को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ उन योग्य उम्मीदवारों के बीच निराशा और आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा है जिन्होंने कड़ी मेहनत से परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की थी या नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे।‘एक पल में हम बेरोजगार हो गए’ – भावुक हुए सफल उम्मीदवारमुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद JSSC-CGL परीक्षा पास करने वाले कई उम्मीदवार मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए भावुक नजर आए। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए एक सफल अभ्यर्थी ने कहा कि सरकार के इस अचानक आए फैसले से उनके जैसे कई छात्र रातों-रात सड़कों पर आ गए हैं। उन्होंने अपने माता-पिता को सांत्वना देते हुए कहा, “मां और पिताजी, प्लीज सब्र रखिए… हम फिर जीतेंगे।”छात्र ने सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि यह निर्णय उच्च न्यायालय (High Court) के आदेशों का भी अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से न्याय की हार हुई है और वे अपने वैध हक के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। एक अन्य अभ्यर्थी ने दुख जताते हुए कहा, “हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद हमारी नियुक्ति हुई थी। हमारे पास सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी की मुहर थी, फिर भी सरकार ने ऐसा कर दिया। हमारे उन सैकड़ों भाइयों का क्या होगा जिन्होंने अपनी पुरानी नौकरियां छोड़कर इसे ज्वाइन किया था? हम एक बार फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।”देवेंद्र महतो बोले- ‘अनशन खत्म, लेकिन संघर्ष जारी रहेगा’छात्र नेता देवेंद्र महतो ने परीक्षा रद्द होने के ऐलान के बाद अपना अनशन तो समाप्त कर दिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। आज तक से बातचीत में महतो ने कहा कि वे एक ऐसी पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं जहां भविष्य में छात्रों को इस तरह की वेदना का सामना न करना पड़े।उन्होंने कहा कि इसी साल जनवरी में भी उन्होंने आंदोलन के जरिए सीजीएल परीक्षा रद्द कराई थी, लेकिन उसके बाद दोबारा हुई परीक्षा में फिर से पेपर लीक हो गया। उन्होंने झारखंड सरकार के सामने मांग रखी है कि भविष्य की परीक्षाओं में पेपर लीक या धांधली रोकने के लिए एक फुल-प्रूफ सिस्टम बनाया जाए और अगर कोई गड़बड़ी करने की कोशिश करे, तो उसे कठोर से कठोर सजा दी जाए।फिलहाल, इस फैसले के बाद झारखंड का सियासी और शैक्षणिक पारा फिर से चढ़ गया है। जहां एक तरफ बेरोजगार युवा और छात्र संघ इस निर्णय को अपनी जीत मान रहे हैं, वहीं नौकरी पा चुके चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।