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उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में गहराया जल संकट: औद्योगिक कचरे ने भूजल को बनाया ‘ज़हरीला पीला’, लाखों ग्रामीणों का जीवन दांव पर

विवेक ओझा/ कानपुर देहात: कल्पना कीजिए कि आप प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप चलाएं और उसमें से पानी की जगह पीले और हरे रंग का ज़हरीला रसायन बाहर निकले! यह कोई डरावनी फिल्म का दृश्य नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के कुछ ज़िलों की खौफनाक ज़मीनी हकीकत है। राज्य के कुछ हिस्सों में भूजल इतना अधिक दूषित हो चुका है कि हैंडपंप से निकलने वाला पानी पीले-हरे रंग (yellow-green) का दिखाई दे रहा है। यह स्थिति एक बहुत बड़े पर्यावरणीय और मानवीय संकट की ओर इशारा कर रही है।

इस भयानक जल प्रदूषण का मुख्य कारण दशकों से बेखौफ तरीके से फेंका जा रहा औद्योगिक कचरा (industrial waste dumping) है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के तीन ज़िलों के कई हिस्सों में ज़मीन के नीचे का पानी भारी धातुओं, विशेष रूप से ‘क्रोमियम (VI)’ (chromium (VI)) से बुरी तरह दूषित हो चुका है। क्रोमियम (VI) एक बेहद विषैला और कैंसर पैदा करने वाला रसायन माना जाता है। कानपुर देहात ज़िले के अकबरपुर तहसील में स्थित शिवनाथपुरा (Shivnathpura) गांव इस भारी धातु के संदूषण (heavy metal contamination) का एक प्रमुख उदाहरण है, जहाँ हैंडपंपों से पीला पानी उगलते देखा जा सकता है।

इस ज़हरीले पानी ने हज़ारों निर्दोष ग्रामीणों को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों (serious health risks) और जानलेवा बीमारियों के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। चर्म रोग, पेट की गंभीर बीमारियां और कैंसर जैसी भयानक व्याधियां इन इलाकों में आम होती जा रही हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि प्रशासन इस पूरी त्रासदी से अनजान नहीं है। ग्रामीणों द्वारा कई वर्षों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं और यहां तक कि अदालतों ने भी इस मामले में कई बार हस्तक्षेप (court intervention) किया है।

इसके बावजूद, प्रदूषित क्षेत्रों की पहचान करने, ग्रामीणों को पीने का सुरक्षित पानी (safe drinking water) मुहैया कराने, स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने और ज़हरीले कचरे को साफ करने (clean up toxic waste) के सरकारी प्रयास बेहद धीमे और अपर्याप्त (slow and inadequate) साबित हुए हैं। कारखानों के मुनाफे के लिए आम जनता की जान से इस तरह का खिलवाड़ प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक बड़ी मिसाल है। अगर सरकार ने तुरंत कोई युद्धस्तर पर राहत और सफाई अभियान नहीं चलाया, तो यह इलाका रहने लायक नहीं बचेगा और एक बहुत बड़ी मानवीय त्रासदी जन्म लेगी।