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आंध्र प्रदेश में शहरी कायाकल्प की नई लहर: ‘सस्टेनेबल’ शहरी मॉडल बनाने की कवायद तेज़, बदल रही है विशाखापत्तनम की तस्वीर

सरिता त्रिपाठी/ अमरावती / विशाखापत्तनम: तेज़ी से बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों के कारण आज भारत के लगभग सभी बड़े शहर बेतरतीब शहरीकरण, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण जैसी भारी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इन समस्याओं से पार पाने और भविष्य के लिए शहरों को रहने योग्य बनाने के लिए, आंध्र प्रदेश सरकार (Andhra Pradesh) एक व्यापक शहरी परिवर्तन (urban transformation) की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है।

राज्य का नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग (Municipal Administration and Urban Development – MA&UD) पुराने और अप्रचलित प्रशासनिक ढर्रों (archaic administration) से बाहर निकलकर राज्य में एक नया ‘सस्टेनेबल’ (टिकाऊ) शहरी मॉडल (sustainable urban model) स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। इस नए मॉडल का उद्देश्य केवल कंक्रीट की ऊंची इमारतें खड़ी करना नहीं है, बल्कि ग्रीन स्पेस, उन्नत सीवरेज सिस्टम, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है।

आंध्र प्रदेश के इस शहरी कायाकल्प की सबसे ज्वलंत और शानदार तस्वीर विशाखापत्तनम (Visakhapatnam) में देखने को मिल रही है। विशाखापत्तनम का ‘येनदाडा-मधुरवाड़ा कॉरिडोर’ (Yendada-Madhurawada corridor) इस आधुनिक विकास का एक प्रमुख प्रतीक बन गया है, जहाँ की चमचमाती स्काईलाइन (skyline) राज्य के आधुनिक और सुनहरे भविष्य की गवाही दे रही है। यह कॉरिडोर अब केवल एक रिहायशी इलाका नहीं, बल्कि आईटी और व्यावसायिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

हालांकि, एक आदर्श और टिकाऊ शहर बनाना कोई रातों-रात होने वाला काम नहीं है। राज्य के नगर प्रशासन विभाग (MA&UD) के सामने कई ढांचागत और वित्तीय चुनौतियां भी हैं। सदियों पुराने शहरी लेआउट को आधुनिक स्मार्ट सिटी के मानकों के अनुरूप ढालना एक जटिल प्रक्रिया है। फिर भी, राज्य सरकार विदेशी निवेश, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल और नई तकनीक के ज़रिए इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रही है। अगर आंध्र प्रदेश का यह सस्टेनेबल अर्बन मॉडल सफल रहता है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए शहरी नियोजन (Urban Planning) की एक बेहतरीन मिसाल पेश करेगा।