ज़मीनी निष्ठा और संगठन का इनाम: जानिए कौन हैं भाजपा के नए राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी, यूपी से लोकसभा हारने के बाद भी कैसे चमकी किस्मत?

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ लखनऊ / नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने केंद्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को पार्टी का नया ‘राष्ट्रीय महासचिव’ (National General Secretary) नियुक्त किया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बस्ती सीट से पराजय का सामना करने के बावजूद, पार्टी आलाकमान द्वारा उन्हें इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण सांगठनिक ज़िम्मेदारी सौंपा जाना यह साबित करता है कि भाजपा में चुनावी नतीजों से ज़्यादा संगठन के प्रति निष्ठा और ज़मीनी मेहनत को प्राथमिकता दी जाती है।
हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर बेहद प्रेरणादायी और पूरी तरह से ज़मीनी कार्यकर्ता से शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने की कहानी है। छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत करने वाले हरीश द्विवेदी लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में सक्रिय रहे। उन्होंने पूर्वांचल के ज़मीनी मुद्दों को उठाकर संगठन में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी सांगठनिक क्षमता और कार्यकर्ताओं पर पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में बस्ती से टिकट दिया, जहां वे जीतकर पहली बार संसद पहुंचे। इसके बाद 2019 के आम चुनाव में भी उन्होंने दोबारा शानदार जीत हासिल की।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में कड़े त्रिकोणीय मुकाबले और स्थानीय जातिगत समीकरणों के कारण उन्हें बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन चुनाव हारने के बाद भी हरीश द्विवेदी निराश होकर घर नहीं बैठे, बल्कि वे पूरी निष्ठा के साथ संगठन के कार्यों में रम गए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य चुनावी राज्यों में पार्टी द्वारा सौंपी गई हर ज़िम्मेदारी को पूरी संजीदगी से निभाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज के बीच हरीश द्विवेदी की मजबूत पकड़ और उनकी गैर-विवादित छवि ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा आलाकमान ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर एक स्पष्ट संदेश दिया है कि जो नेता ज़मीन पर रहकर कार्यकर्ताओं को जोड़े रखेगा, संगठन उसका पूरा सम्मान करेगा। हरीश द्विवेदी की यह पदोन्नति पूर्वांचल की राजनीति में भाजपा के सांगठनिक ढांचे को और धार देगी।