“कंपनी हमारी जान जोखिम में डाल रही है”: खौफनाक होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के दबाव पर भारतीय नाविकों ने भेजा SOS संदेश, मचा हड़कंप
राघवेंद्र प्रताप सिंह/ चेन्नई / नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद गंभीर और अलार्मिंग खबर सामने आई है। ‘फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया’ (FSUI) ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि ‘एएम पायनियर’ (AM Pioneer) नामक एक वाणिज्यिक जहाज़ के मालिकों और प्रबंधकों द्वारा उस पर सवार 16 भारतीय क्रू सदस्यों (चालक दल) की जान को जानबूझकर भारी जोखिम में डाला जा रहा है। क्रू सदस्यों ने आरोप लगाया है कि उन्हें ‘हाई-रिस्क’ ज़ोन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसके बाद जहाज़ के मास्टर ने मदद के लिए आपातकालीन SOS संदेश भेजा है।
FSUI द्वारा जारी किए गए एक वीडियो स्क्रीनशॉट में एएम पायनियर के मास्टर, अनिल राज, को स्पष्ट रूप से जहाज़ से एक हताश SOS (Save Our Souls) संदेश भेजते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में उनके पीछे अन्य भारतीय नाविक भी डरे और सहमे हुए नज़र आ रहे हैं। मास्टर अनिल राज का दावा है कि शिपिंग कंपनी लगातार उन पर दबाव बना रही है कि वे सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी करते हुए इस अशांत और संघर्ष-ग्रस्त जलमार्ग से जहाज़ को पार कराएं। नाविकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे भारी सैन्य तनाव के बीच इस रास्ते से गुज़रना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित एक बेहद संकीर्ण लेकिन रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हाल के हफ्तों में, इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है। ईरान और अन्य क्षेत्रीय ताकतों द्वारा इस जलमार्ग से गुज़रने वाले कई वाणिज्यिक जहाज़ों को निशाना बनाने या उन्हें ज़ब्त करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे युद्ध जैसे हालात में किसी भी निहत्थे वाणिज्यिक जहाज़ का वहां से गुज़रना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा कानूनों का खुला उल्लंघन है।
इस घटना ने एक बार फिर बहुराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की उस अमानवीय कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है, जहां माल की समय पर डिलीवरी और कॉरपोरेट मुनाफे को नाविकों की जान से ज्यादा अहमियत दी जाती है। ‘फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया’ ने भारत सरकार, विशेषकर विदेश मंत्रालय और जहाजरानी मंत्रालय से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। यूनियन की मांग है कि शिपिंग कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और फंसे हुए 16 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाया जाए। यह मामला समुद्री श्रम कानूनों (Maritime Labour Convention) के तहत नाविकों के ‘खतरनाक क्षेत्रों में काम करने से इनकार करने के अधिकार’ पर एक बड़ी वैश्विक बहस को जन्म दे रहा है।