झारखंड में छात्रों के भारी विरोध के आगे झुकी सरकार: दागी एजेंसी द्वारा आयोजित JSSC-CGL समेत सभी परीक्षाएं रद्द, CID की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ रांची: झारखंड में पिछले कई हफ्तों से सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में हुई व्यापक धांधली और पेपर लीक को लेकर चल रहा उग्र छात्र आंदोलन आखिरकार एक बड़े प्रशासनिक फैसले में तब्दील हो गया है। राज्य भर के युवाओं के भारी दबाव और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘झारखंड कर्मचारी चयन आयोग’ (JSSC) द्वारा आयोजित CGL परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द (Cancel) कर दिया है। इसके साथ ही, उस दागी एजेंसी (Tainted firm) द्वारा आयोजित की गई अन्य सभी परीक्षाओं को भी निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया है।
सरकार के इस बड़े फैसले के बाद राज्य के उन लाखों छात्रों ने राहत की सांस ली है, जो कड़कड़ाती धूप और बारिश में सड़कों पर उतरकर न्याय की गुहार लगा रहे थे। कई जगहों पर छात्रों ने इस फैसले का जश्न भी मनाया। हालांकि, छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा रद्द करना समस्या का केवल एक अस्थायी समाधान है। जब तक इस पूरे संगठित परीक्षा माफिया और ‘पेपर लीक’ गिरोह की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच नहीं कराई जाती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्रों का आरोप है कि राज्य की एजेंसियां रसूखदार नेताओं और अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर सकती हैं।
इस बीच, झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज़ कर दी है। राज्य सीआईडी की विशेष टीमों ने रांची स्थित जेएसएससी (JSSC) के मुख्यालय पर सघन तलाशी अभियान (Searches) चलाया है। सीआईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, कंप्यूटर हार्ड ड्राइव और सर्वर का डेटा ज़ब्त किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सिलसिले में कुछ अहम गिरफ्तारियां भी की गई हैं, जिनमें दागी परीक्षा एजेंसी के कुछ अधिकारी और दलाल शामिल हैं।
झारखंड की राजनीति में यह ‘पेपर लीक’ कांड अब एक बहुत बड़ा भूचाल बन चुका है। राज्य सरकार के लिए यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकट भी है, क्योंकि आगामी चुनावों में युवा वर्ग का यह आक्रोश भारी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके कैबिनेट मंत्रियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर जनता को आश्वस्त करने का प्रयास किया है कि भविष्य में सभी भर्ती परीक्षाएं पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त तरीके से आयोजित की जाएंगी। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बार-बार परीक्षाएं रद्द होने से उन ईमानदार छात्रों का मनोबल बुरी तरह टूट रहा है, जो सालों से इन नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार सीबीआई जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है।