सोशल मीडिया से स्लीपर सेल तैयार कर रहा था गैंगस्टर शहज़ाद भट्टी, भारत के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर थी हमले की साजिश

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ चल रही जंग में जांच एजेंसियों ने एक बेहद खौफनाक और हाई-टेक आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। खुफिया जांच में यह बात सामने आई है कि कुख्यात गैंगस्टर शहज़ाद भट्टी युवाओं को बरगलाने और अपना नेटवर्क खड़ा करने के लिए सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा था। यह मामला दर्शाता है कि कैसे अपराध और आतंकवाद का गठजोड़ अब डिजिटल दुनिया के ज़रिए देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, गैंगस्टर शहज़ाद भट्टी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से अपना काला कारोबार संचालित करता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वह इंटरनेट की दुनिया में एक ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर’ (social media influencer) के रूप में भी जाना जाता है। इसी लोकप्रियता की आड़ में वह भारत के भोले-भाले और गुमराह युवाओं को अपने आतंकी मंसूबों के लिए मोहरा बना रहा था।

पुलिस का कहना है कि भट्टी ने युवाओं को देश के महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रतिष्ठानों के पास हथगोले (grenades) फेंकने और विस्फोटक (explosives) लगाने के लिए भारी रकम की पेशकश की थी। साजिश का दायरा केवल विस्फोटकों तक सीमित नहीं था; गुर्गों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण वायु सेना अड्डों (air bases), प्रमुख रेलवे स्टेशनों और राष्ट्रीय राजमार्गों व सड़कों के पास खुफिया कैमरे स्थापित करने का भी काम सौंपा गया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि इन खुफिया कैमरों के ज़रिए रिकॉर्ड की गई देश के अहम ठिकानों की लाइव फुटेज और संवेदनशील जानकारी कथित तौर पर सीमा पार पाकिस्तान (Pakistan) भेजी जा रही थी। इसका सीधा अर्थ है कि यह गिरोह न केवल स्थानीय अपराधों में शामिल था, बल्कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के लिए जासूसी का काम भी कर रहा था। यह घटना डिजिटल युग में सोशल मीडिया की निगरानी और साइबर पैट्रोलिंग की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करती है, ताकि दुश्मन देश के हैंडलर हमारे युवाओं को स्लीपर सेल में न बदल सकें।