‘भीड़ में घिरे कांस्टेबल ने चलाई थी AK-47’: NEET प्रदर्शन मामले में बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया अपना जवाब

विवेक ओझा/ नई दिल्ली / पटना: बिहार में NEET परीक्षा को लेकर हुए उग्र छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा अत्याधुनिक हथियार के इस्तेमाल का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। इस संवेदनशील घटना पर बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए दावा किया है कि प्रदर्शन के दौरान फंसा हुआ (Trapped) कांस्टेबल ही AK-47 से फायरिंग करने के लिए मजबूर हुआ था। इस स्पष्टीकरण ने कानून-व्यवस्था संभालने के पुलिसिया तरीकों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए बिहार पुलिस ने इस बात को स्वीकार किया कि AK-47 एक ‘प्लाटून-स्तरीय हथियार’ (platoon-level weapon) है, जिसे मुख्य रूप से ‘विशेष अभियानों’ (special operations) के दौरान ही इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने अपने बचाव में ज़ोर देकर कहा कि मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों द्वारा किसी भी प्रकार के अत्यधिक या अनुचित बल (excessive force) का प्रयोग नहीं किया गया था।
पुलिस का कहना है कि जब उग्र भीड़ ने सुरक्षाबलों पर हमला किया और स्थिति बेकाबू होने लगी, तब भी पुलिसकर्मियों ने ‘अत्यधिक संयम’ (utmost restraint) का परिचय दिया था। पुलिस की दलील है कि कांस्टेबल भीड़ के बीच बुरी तरह से घिर गया था और आत्मरक्षा की स्थिति में यह कदम उठाया गया।
इसके साथ ही, अदालत और आम जनता की चिंताओं को दूर करते हुए बिहार पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर रही है। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि जिन छात्रों का कोई भी पुराना आपराधिक रिकॉर्ड (criminal antecedents) नहीं है, उनके खिलाफ कोई भी बलपूर्वक या दमनकारी उपाय (coercive measures) नहीं अपनाए जा रहे हैं। यह मामला नागरिक अधिकारों, छात्र आंदोलनों और भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस की जवाबदेही से जुड़े अहम सवालों को उठाता है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम नज़रिया बेहद महत्वपूर्ण होगा।