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मोदी कैबिनेट में फेरबदल की सुगबुगाहट: कई मंत्रियों के विभाग बदलने की तैयारी, जानें क्या हैं सियासी समीकरण

New Delhi : केंद्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलावों के कयास तेज हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की टीम में जल्द ही बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि करीब दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया जा सकता है। इस संभावित बदलाव के जरिए कुछ मंत्रियों का कार्यभार कम किया जा सकता है, तो वहीं कुछ नए और पुराने चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। आइए जानते हैं कि इस संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में किन बातों की चर्चा है और इसके क्या मायने निकाले जा रहे हैं।किन मंत्रियों के विभागों में बदलाव के कयास?भारतीय जनता पार्टी द्वारा सांगठनिक जिम्मेदारियों में बदलाव के बाद अब सरकार स्तर पर भी फेरबदल की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। चर्चा है कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में बने रह सकते हैं, क्योंकि अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों और वार्ताओं में उनका योगदान अहम माना जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर शिक्षा मंत्रालय से जुड़े घटनाक्रमों के बाद धर्मेंद्र प्रधान के विभाग को लेकर भी विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के राजनीतिक भविष्य और उनके आगामी कार्यकाल को लेकर भी सियासी अटकलें जारी हैं। यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है, तो महिलाओं और विभिन्न क्षेत्रों को साधने के लिए नए चेहरों को शामिल किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।सहयोगी दलों की बढ़ सकती है हिस्सेदारीइस संभावित फेरबदल में एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका और उनकी मांगें भी बेहद अहम रहने वाली हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सहयोगी दलों के नेता अपनी पार्टियों के लिए केंद्र सरकार में और अधिक बड़े मंत्रालयों की मांग कर रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान तथा महाराष्ट्र में एनडीए के अन्य घटक दल भी अपने कोटे से और अधिक प्रतिनिधित्व चाहते हैं। इसके अलावा, दक्षिण भारत और उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों के समीकरणों को संतुलित करने के लिए भी मंत्रिमंडल और संगठन स्तर पर विशेष ध्यान दिए जाने की चर्चा है।चुनावी राज्यों और सामाजिक समीकरणों पर जोरआगामी विधानसभा चुनावों और राजनीतिक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए इस फेरबदल को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश और अन्य चुनावी राज्यों के राजनीतिक और सामाजिक संतुलन को साधने के लिए पार्टी संगठन और सरकार के बीच समन्वय बिठाया जा रहा है। हाल ही में भाजपा ने अपनी द हिंदू की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की है, जिसके बाद अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में भी फेरबदल की चर्चाएं जोर पकड़ चुकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव सरकार के कामकाज को और अधिक गति देने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक मध्यावधि कदम साबित हो सकता है।