12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक: भारत ने उठाई ‘जन-केंद्रित’ पर्यावरण संरक्षण की जोरदार आवाज

अभिषेक सिंह
वैश्विक जलवायु संकट के बीच 12वीं ब्रिक्स (BRICS – ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य नए सदस्य) पर्यावरण मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक मजबूत, व्यावहारिक और जन-केंद्रित (People-centric) दृष्टिकोण अपनाने का पुरजोर आह्वान किया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि केवल खोखले वादों से पृथ्वी को नहीं बचाया जा सकता, इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता है।
भारत का स्पष्ट रुख:
बैठक के दौरान भारत ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो आम जनता के अनुकूल हों और उनका कार्यान्वयन आसानी से किया जा सके। भारत ने अपनी सफल ‘LiFE’ (Lifestyle for Environment) पहल का उदाहरण दुनिया के सामने रखा, जो संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल की जगह उनके विवेकपूर्ण उपयोग पर बल देती है।
जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण का मुद्दा:
भारत ने विकसित देशों को उनकी ऐतिहासिक जिम्मेदारी की याद दिलाते हुए कहा कि विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए पर्याप्त ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ (जलवायु वित्त) और किफायती दरों पर ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ब्रिक्स देशों की विश्व की आबादी और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए इस समूह का एकजुट प्रयास पूरी दुनिया पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
सहयोग के नए आयाम:
बैठक के अंत में सभी सदस्य देशों ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन, जल संरक्षण, जैव विविधता के नुकसान को रोकने और सर्कुलर इकोनॉमी (कचरे को संसाधन में बदलना) को बढ़ावा देने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। भारत का यह कड़ा और स्पष्ट रुख साबित करता है कि वह वैश्विक पर्यावरण कूटनीति में अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभा रहा है।