पुणे में 7वीं ब्रिक्स ICT बैठक का आगाज: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा पर गहरा मंथन
विवेक ओझा
भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ कहे जाने वाले शहरों में से एक, पुणे में 7वीं ब्रिक्स (BRICS) सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) कार्य समूह की एक बेहद अहम अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित की जा रही है। डिजिटल क्रांति के इस दौर में आयोजित हो रही यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग, डेटा सुरक्षा और भविष्य की डिजिटल नीतियों का खाका तैयार करने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्य एजेंडा: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)
इस दो दिवसीय बैठक में भारत का मुख्य फोकस ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ (DPI) पर है। भारत ने दुनिया के सामने आधार (Aadhaar), यूपीआई (UPI), कोविन (CoWIN) और डिजिलॉकर जैसे सफल मॉडल पेश किए हैं, जिन्होंने साबित कर दिया है कि तकनीक कैसे आम आदमी के जीवन को आसान बना सकती है। भारत इन तकनीकों को अन्य ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा करने का प्रस्ताव रख रहा है ताकि वहां भी पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त डिजिटल शासन (Digital Governance) की स्थापना हो सके।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा:
बैठक का दूसरा सबसे अहम मुद्दा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा है। जिस तेजी से AI का विकास हो रहा है, वह अवसर के साथ-साथ डीपफेक (Deepfake) और साइबर हमलों जैसे खतरे भी ला रहा है। ब्रिक्स सदस्य देश एक साझा साइबर सुरक्षा तंत्र विकसित करने, डेटा गोपनीयता के लिए नियम बनाने और तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक संयुक्त रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
पुणे में हो रही यह बैठक इस बात का संकेत है कि ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक तकनीकी मानकों (Global Tech Standards) को तय करने में भी पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका और यूरोप) के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। भारत का DPI मॉडल इस दिशा में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।