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डिजिटल होगा छत्तीसगढ़ का हर गांव: ‘भारतनेट कार्यक्रम’ के विस्तार के लिए ऐतिहासिक MoU पर हस्ताक्षर

सरिता त्रिपाठी

डिजिटल डिवाइड को खत्म करने और ग्रामीण भारत को मुख्यधारा से जोड़ने के भारत सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘भारतनेट’ (BharatNet) ने छत्तीसगढ़ में एक लंबी छलांग लगाई है। राज्य के दूरस्थ, जनजातीय और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT), छत्तीसगढ़ सरकार और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम क्या है?
इस MoU के तहत ‘संशोधित भारतनेट कार्यक्रम’ को राज्य में लागू किया जाएगा। पहले चरण में ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) को ग्राम पंचायतों तक पहुंचाया गया था। अब इस संशोधित योजना के तहत न केवल पंचायतों को बल्कि गांवों के भीतर तक इंटरनेट की लाइनें बिछाई जाएंगी और सरकारी संस्थानों (जैसे पंचायत भवन, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र) को मुफ्त वाई-फाई कनेक्शन प्रदान किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के लिए इसके मायने:
छत्तीसगढ़ की एक बड़ी आबादी जंगलों और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में निवास करती है, जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या है। इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद इसके निम्नलिखित दूरगामी प्रभाव होंगे:

  1. शिक्षा: ग्रामीण बच्चे ऑनलाइन क्लासेज, ई-लर्निंग और डिजिटल लाइब्रेरी का उपयोग कर सकेंगे।
  2. टेलीमेडिसिन: दूरस्थ गांवों के मरीज इंटरनेट के जरिए बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकेंगे।
  3. ई-गवर्नेंस: आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र या पेंशन जैसी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को शहर नहीं जाना पड़ेगा; सारा काम गांव के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से हो जाएगा।
  4. सुरक्षा: नक्सल प्रभावित इलाकों में बेहतर संचार व्यवस्था होने से सुरक्षा बलों और प्रशासन को ऑपरेशन और विकास कार्यों में मदद मिलेगी।

यह समझौता छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर और तकदीर बदलने वाला एक क्रांतिकारी कदम है।