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कानपुर में गंगा का उफान तेज: प्रशासन अलर्ट, बाढ़ संभावित इलाकों के 176 गांवों में निगरानी सख्त

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से निचले इलाकों में जलभराव जैसी विकट स्थिति उत्पन्न होने लगी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने कानपुर के बाढ़ संभावित इलाकों के करीब 176 गांवों को बुधवार को पूरी तरह सतर्क कर दिया है। पुलिस और जिला प्रशासन ने निगरानी को और अधिक मजबूत करते हुए बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने जानकारी दी है कि प्रभावित क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर करीब 35 नई चौकियां स्थापित की गई हैं।कानपुर बैराज से छोड़ा गया भारी पानीगंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कानपुर में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। 19 अगस्त सुबह 8 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, कानपुर बैराज पर अपस्ट्रीम जलस्तर 113.570 मीटर और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 113.420 मीटर दर्ज किया गया। इस दौरान बैराज से लगभग 2 लाख 91 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। हालांकि वर्तमान में जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे है, लेकिन प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए लगातार पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।नदियों का जलस्तर और चेतावनी के आंकड़ेकानपुर बैराज का चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का निशान 115 मीटर निर्धारित किया गया है। वहीं, शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.180 मीटर दर्ज किया गया है, जहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। इसके अलावा, हरिद्वार बैराज से 1 लाख 18 हजार 622 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1 लाख 15 हजार 137 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे के सभी इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।निचले इलाकों में विशेष चौकसी और सुरक्षा प्रबंधपुलिस कमिश्नर ने बताया कि गंगा नदी के किनारे और निचले हिस्सों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जबकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोकने के लिए प्रमुख घाटों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए नदी तट को पूरी तरह साफ करा दिया गया है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों में जाने की सलाह दी गई है। पुलिस विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को उफनती नदी में उतरने से रोकने के लिए लगातार गश्त कर रही है।किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के समन्वय से विशेष आपातकालीन नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि संभावित आपदा से निपटने के लिए प्रशासन के पास सभी आवश्यक संसाधन पूरी तरह तैयार हैं।एनडीआरएफ और गोताखोरों की तैनातीप्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेजी से अंजाम देने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर करीब 35 चौकियां बनाई गई हैं। इसके अलावा 36 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम, एक पूर्ण बाढ़ राहत दल, करीब 100 प्रशिक्षित आपदा राहत गोताखोरों के साथ-साथ होमगार्ड, पीएसी और नागरिक पुलिस के जवानों को भी बचाव कार्यों के लिए मैदान में उतार दिया गया है।