यूपी के किसानों के लिए संजीवनी बनी ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’, 38 हजार से अधिक परिवारों को मिला लाभ
राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ लखनऊ: लखनऊ। उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मूल आधारशिला किसान और खेती ही हैं। राज्य की एक बड़ी आबादी आज भी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है। ऐसे में खेती-किसानी से जुड़े परिवारों को किसी अनहोनी की स्थिति में आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना योगी सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी अत्यंत संवेदनशील और जन-कल्याणकारी सोच के तहत ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ शुरू की गई थी, जो आज प्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक बड़ा सहारा (तोहफा) बनकर सामने आई है।
योजना का उद्देश्य और प्रभाव:
दुर्घटना की स्थिति में किसान और उसके परिवार को अचानक आने वाले गहरे आर्थिक संकट से बचाने के लिए यह योजना शुरू की गई है। सरकार ने इस योजना को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने के लिए इसे लगातार एक मजबूत बजटीय आधार प्रदान किया है। करोड़ों रुपये के बजट प्रावधान के साथ बड़ी संख्या में आश्रित परिवारों को समय पर इसका लाभ मिलना, इस योजना के व्यापक और सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष से लेकर अब तक 38 हजार से अधिक आश्रितों को इस योजना के तहत लाभान्वित किया जा चुका है, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
योजना की मुख्य विशेषताएं और पात्रता:
यह योजना 14 सितंबर 2019 से पूरे प्रदेश में लागू है। इसके तहत खेती-किसानी करते समय, किसी भी प्रकार की दुर्घटना (जैसे सांप का काटना, आकाशीय बिजली गिरना, ट्रैक्टर दुर्घटना आदि) के कारण यदि किसान की मृत्यु हो जाती है या वह पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो राज्य सरकार की ओर से उसके परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) दी जाती है। आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी तय मानकों के अनुसार सहायता राशि का प्रावधान है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका विस्तृत दायरा है। इसमें केवल वे किसान शामिल नहीं हैं जिनके नाम पर कृषि भूमि (खातेदार/सह-खातेदार) है, बल्कि वे भूमिहीन किसान भी इसके दायरे में आते हैं जो बटाई पर या पट्टे पर दूसरों के खेतों में काम करते हैं। इसके लिए किसान की आयु 18 वर्ष से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में किसान परिवारों के लिए एक रक्षा कवच है। पारदर्शी तरीके से और बिना किसी बिचौलिए के लाभार्थियों तक सीधे पैसा पहुंचना सुशासन का प्रतीक है, जो ग्रामीण उत्तर प्रदेश को और अधिक आत्मनिर्भर बना रहा है।