“1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश तो सिर्फ हिमशैल का सिरा है”: मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर नागरिकों के अधिकार छीनने का लगाया आरोप

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: भारत में डिजिटल अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी निगरानी को लेकर एक बहुत बड़ी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया है कि सरकार द्वारा जारी किए गए 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश केवल एक ‘हिमशैल का सिरा’ (tip of the iceberg) मात्र हैं।

विपक्षी नेता का यह बयान इस चिंता को रेखांकित करता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स और डिजिटल माध्यमों पर सरकार का नियंत्रण लगातार कड़ा होता जा रहा है। खरगे ने मोदी सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वह नागरिकों के ‘सवाल पूछने के अधिकार’ पर एक “निर्लज्ज और सुनियोजित हमला” (brazen and calculated attack) कर रही है।

डिजिटल युग में इंटरनेट केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक असहमति और जन-भागीदारी का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। ऐसे में लाखों की संख्या में यूआरएल (URLs), सोशल मीडिया अकाउंट्स या पोस्ट्स को ब्लॉक किए जाने के खुलासे ने नागरिक अधिकार संगठनों और प्राइवेसी के पैरोकारों की नींद उड़ा दी है। खरगे का यह बयान इंगित करता है कि जो आंकड़े सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं, वे ज़मीनी हकीकत से बहुत कम हैं और पर्दे के पीछे बड़े पैमाने पर ‘सेंसरशिप’ की जा रही है।

सरकार अक्सर इस तरह के ब्लॉकिंग आदेशों को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और फेक न्यूज़ पर लगाम लगाने के लिए आवश्यक बताती है। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि इन सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों की आवाज़ को दबाने, सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को चुप कराने और आम जनता में डर का माहौल पैदा करने के लिए किया जा रहा है। यह मुद्दा आने वाले संसद सत्रों और चुनावी रैलियों में गूंजने की पूरी संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने से जुड़ा है।