“बच्चों को लत लगाई और जनता को गुमराह किया”: मेटा (Meta) पर भड़के अमेरिकी अभियोजक, राज्यों के गठबंधन ने की 200 बिलियन डॉलर जुर्माने की मांग

सरिता त्रिपाठी/ ओकलैंड, अमेरिका / नई दिल्ली: मार्क जुकरबर्ग की अगुवाई वाली दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी ‘मेटा’ (जिसके तहत फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप आते हैं) के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा और खौफनाक कानूनी संकट साबित हो सकता है। अमेरिका में अभियोजकों (Prosecutors) ने आरोप लगाया है कि मेटा ने जानबूझकर बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म्स की लत लगाई (hooked children) और आम जनता को गुमराह (misled public) किया है। यह मामला कॉर्पोरेट लालच और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के बीच टकराव का सबसे ज्वलंत उदाहरण बन गया है।

मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई विशेषज्ञों ने इस कानूनी कार्रवाई को सोशल मीडिया का ‘बिग टोबैको मोमेंट’ (big tobacco moment) करार दिया है। जिस तरह दशकों पहले तंबाकू कंपनियों पर यह तथ्य छिपाने के लिए भारी जुर्माना लगाया गया था कि उनके उत्पाद कैंसर का कारण बनते हैं, ठीक उसी तर्ज़ पर अब टेक कंपनियों को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।

अमेरिकी राज्यों के एक मजबूत गठबंधन (coalition of States) ने मांग की है कि ऐसे उत्पाद डिज़ाइन करने के लिए जो बच्चों में लत (addictive) पैदा करते हैं, मेटा पर लगभग 200 बिलियन डॉलर का ऐतिहासिक जुर्माना लगाया जाना चाहिए। अभियोजकों का तर्क है कि कंपनी के एल्गोरिदम (Algorithms) विशेष रूप से बच्चों की मनोवैज्ञानिक कमज़ोरियों का फायदा उठाने के लिए बनाए गए हैं, जिसके कारण युवाओं में डिप्रेशन, शरीर की छवि (body image) से जुड़े विकार और आत्महत्या की प्रवृत्तियां तेज़ी से बढ़ रही हैं।

यदि यह भारी-भरकम जुर्माना स्वीकृत हो जाता है, तो यह वैश्विक कॉर्पोरेट इतिहास में एक अभूतपूर्व नज़ीर बन जाएगा। यह मुक़दमा केवल वित्तीय दंड तक सीमित नहीं है; यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ‘बिजनेस मॉडल’ पर सीधा प्रहार है। इस कानूनी लड़ाई के परिणाम पूरी दुनिया की सरकारों और नीति-निर्माताओं को प्रेरित करेंगे कि वे अपने-अपने देशों में सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक जवाबदेह बनाएं।