संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने चीन पाकिस्तान को आतंकियों के मुद्दे पर चेताया

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर चीन और पाकिस्तान को साफ शब्दों में समझा दिया है कि वे आतंकियों की ढाल बनना बंद करे। पाकिस्तान आतंकवाद का प्रश्रय दाता, वित्त पोषक और केंद्र बिंदु है। भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ साधने का मंच नहीं बनने दिया जाना चाहिए और आतंकवादियों की लिस्टिंग में राजनीतिक हस्तक्षेप बंद होना चाहिए। सुरक्षा परिषद की ‘कार्यप्रणाली’ पर आयोजित चर्चा के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि योजना पटेल ने किसी देश का नाम लिए बिना पाकिस्तान और चीन के रवैये पर तीखा प्रहार किया।
योजना पटेल ने रखा UN में भारत का पक्ष :
भारत की ओर से बोलते हुए योजना पटेल ने कहा कि आतंकवादियों की सूची तैयार करने या उन्हें हटाने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता होनी चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा, “इस मामले में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता होनी चाहिए। सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को प्रतिबंध सूची से हटाकर उन्हें वैधता दिलाने या केवल राजनीतिक विचारों के आधार पर किसी अन्य संगठन को आतंकी घोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने का मंच नहीं बनना चाहिए।”
चीन-पाकिस्तान पर भारत का UN में वैचारिक हमला :
भारत का यह रुख सीधे तौर पर चीन की चालों पर हमला है। चीन आए दिन लश्कर-ए-तैयाबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवादी संगठनों के सरगनाओं को UNSC की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाता रहा है। चीन UNSC का स्थायी सदस्य होने के नाते ‘तकनीकी रोक’ का इस्तेमाल कर भारत के प्रस्तावों को अटकाता रहा है। भारत ने इसी हरकत को लेकर चीन और पाकिस्तान को चेतावनी दी है।
ग्लोबल साउथ को मिले अधिक प्रतिनिधित्व :
भारत ने इस दौरान सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग भी दोहराई। द्वितीय विश्व युद्ध के समय का जिक्र करते हुए भारत ने कहा कि 80 साल पहले 1945 में हुए एक संघर्ष के नतीजे आज के दौर की सुरक्षा परिषद की संरचना, कार्यप्रणाली और तरीकों को तय नहीं कर सकते।
भारत ने यह भी कहा कि 1945 के बाद से संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता चार गुना बढ़ चुकी है, इसलिए आज की वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं भारत ने सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में भी अन्य देशों को शामिल करने की मांग की ताकि विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।