सोनम वांगचुक हुए फिर से एक्टिव, लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्रालय के सामने रखी ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगों की सूची :

नई दिल्ली ( विवेक ओझा ) : सोनम वांगचुक और लद्दाख के अन्य प्रतिनिधियों ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर अपनी ‘नॉन-नेगोशिएबल’ (गैर-समझौतावादी) मांगों की एक सूची सौंपी है। इस सूची में वित्तीय अधिकार, लद्दाख के लिए यूटी (केंद्र शासित प्रदेश) स्तर की विधानसभा, और पूर्व में हुई पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों में न्याय व मुआवजे की प्रमुख मांगें शामिल हैं।

लद्दाख के प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों में शामिल है:

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए पूर्ण यूटी स्तर की निर्वाचित विधानसभा का गठन।

क्षेत्र के विकास और प्रशासन के लिए लद्दाख को विशेष वित्तीय अधिकार सौंपना।

पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों में निष्पक्ष न्याय और पीड़ितों के लिए उचित मुआवजा।

इस प्रतिनिधिमंडल में लेह एपेक्स बॉडी (LAB), कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सदस्य और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे।

लद्दाख के प्रमुख सामाजिक संगठनों (लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस) की मुख्य मांगें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना है, जिससे वहां की अनूठी संस्कृति, जमीन और पर्यावरण की रक्षा की जा सके।

गौरतलब है कि लद्दाख के लोगों की मांग रही है कि लद्दाख को एक पूर्ण राज्य बनाया जाए और वहां मुख्यमंत्री के साथ विधानसभा की स्थापना हो, जिससे जनता की शासन में सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

छठी अनुसूची (Sixth Schedule): लद्दाख में यह मांग है कि संविधान की छठी अनुसूची लागू की जाए ताकि स्थानीय लोगों की भूमि, भाषा, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों पर उनका विशेष अधिकार सुरक्षित रहे। स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता और आरक्षण का प्रावधान हो, तथा एक अलग ‘लद्दाख लोक सेवा आयोग’ (Public Service Commission) बने और लेह और कारगिल जिलों के लिए अलग-अलग और कुल दो संसदीय क्षेत्र (लोकसभा सीटें) बनाए जाएं।

लेह एपेक्स बाडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने गृह मंत्रालय से स्पष्ट किया है कि लद्दाख में मुख्यमंत्री वाली विधानसभा और व्यापक संवैधानिक सुरक्षा से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा। दोनों संगठनों ने कहा कि लद्दाख के राजनीतिक व प्रशासनिक भविष्य को लेकर अपनी प्रमुख मांगों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। शाम साढ़े सात बजे तक चली इस अढ़ाई घंटे की बैठक में गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रशांत लोखंडे, लद्दाख के मुख्यसचिव आशीष कुंद्रा भी मौजूद रहे।

सितंबर के पहले सप्ताह में होगी बैठक :

इस दौरान तय किया गया कि लद्दाख के मुद्दों पर बातचीत को आगे बढाने के लिए दिल्ली में सितंबर माह के पहले सप्ताह में बैठक होगी। बैठक के दौरान एलएबी व केडीए ने गृह मंत्रालय को सौंप कर ऐसे मुद्दों का लेखा जोखा दिया जिन को लेकर किसी भी प्रकार कर समझौता नही होगा।

इसमें लद्दाख में मुख्यमंत्री वाली विधानसभा, मंत्रिपरिषद होनी चाहिए। विधानसभा के पास वित्तीय अधिकार होने चाहिए। गृह संबंधी मामले विधानसभा के अधीन होने चाहिए।

इसके साथ में गत वर्ष सितंबर में प्रदर्शनों के दौरान दर्ज किए गए सभी मामले वापस लेने का मुद्दा भी उठा। संगठन ने स्पष्ट किया कि इस प्रदर्शन के दौरान बलिदान देने वाले चार लोगों व पहले बलिदान देने वाले लद्दाखियों की याद में निश्चित तौर पर बलिदान दिवस मनाया जाएगा।