हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद: कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर मल्लिकार्जुन खरगे ने जताई निराशा, राहुल गांधी ने की सख्त निगरानी की मांग

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के भीतर सामाजिक न्याय और पार्टी नेताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता को लेकर एक गंभीर अंतर्मंथन शुरू हो गया है। नई दिल्ली में बंद दरवाज़ों के पीछे हुई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की एक अहम बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी गहरी निराशा व्यक्त की। यह निराशा हल्द्वानी में उनकी रैली के बाद कुछ दक्षिणपंथी समूहों द्वारा किए गए कथित ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की रहस्यमयी चुप्पी को लेकर थी।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। जब पार्टी के एक दलित अध्यक्ष के खिलाफ छुआछूत जैसी कुरीतियों का प्रदर्शन किया गया, तो उस पर पार्टी नेताओं का खुलकर बचाव में न आना नेतृत्व को नागवार गुज़रा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे संवेदनशील और वैचारिक मुद्दों पर पार्टी सहयोगियों के बयानों और उनके रुख की सख्त निगरानी (Monitoring) की जानी चाहिए। उनका मानना है कि जो नेता पार्टी की मूल धर्मनिरपेक्ष और समतावादी विचारधारा के साथ खड़े नहीं हो सकते, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

यह CWC बैठक केवल इसी मुद्दे तक सीमित नहीं रही। इस उच्च स्तरीय बैठक में हाल ही में देश भर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी गहरी चर्चा हुई। इस दौरान वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी और राहुल गांधी के बीच मतभेद (Difference of opinion) भी देखने को मिला। जहाँ एक ओर कुछ नेता छात्रों के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के पक्ष में हैं, वहीं कुछ नेता इसके राजनीतिक परिणामों को लेकर सतर्क दृष्टिकोण अपनाने की वकालत कर रहे हैं।

सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल की उपस्थिति वाली इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस अब अपने वैचारिक संघर्षों को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। पार्टी अध्यक्ष के सम्मान और दलित स्वाभिमान के मुद्दे पर आलाकमान ने अपने काडरों को एक साफ संदेश दे दिया है कि राजनीतिक सहूलियत के लिए वैचारिक चुप्पी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।