यूट्यूबर ‘सवुकु’ शंकर पर कसा कानूनी शिकंजा: चेन्नई के पूर्व पुलिस कमिश्नर ए. अरुण ने ठोका 1 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा

सरिता त्रिपाठी
चेन्नई
सोशल मीडिया पर बिना किसी पुख्ता सबूत के सार्वजनिक हस्तियों और अधिकारियों की छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ अब एक बड़ा कानूनी संदेश सामने आया है। चेन्नई के पूर्व पुलिस कमिश्नर (Former Chennai Police Commissioner) और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ए. अरुण (A. Arun) ने तमिलनाडु के विवादास्पद राजनीतिक टिप्पणीकार और यूट्यूबर ‘सवुकु’ शंकर (‘Savukku’ Shankar) के खिलाफ 1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का एक बड़ा मुकदमा (defamation suit) दायर किया है।
आईपीएस अधिकारी ए. अरुण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सवुकु शंकर ने अपने यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उनके खिलाफ लगातार आधारहीन, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण टिप्पणियां की हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंची है। शंकर अपने बयानों और सनसनीखेज दावों के लिए अक्सर विवादों में रहते हैं और इससे पहले भी कई नौकरशाहों तथा राजनेताओं के साथ उनका टकराव हो चुका है।
मुकदमे में केवल 1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि पूर्व पुलिस कमिश्नर ने न्यायपालिका से एक और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश की मांग की है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि वह टेक दिग्गज कंपनियों—यूट्यूब (YouTube) और एक्स कॉर्प (X Corp – पूर्व में ट्विटर)—को निर्देश दे कि वे उनके खिलाफ पोस्ट किए गए सभी मानहानिकारक वीडियो और ट्वीट्स (defamatory videos and tweets) को अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटा लें (take down)।
यह मामला डिजिटल युग में ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और ‘व्यक्तिगत निजता व सम्मान’ के बीच की बारीक रेखा को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकदमा उन कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो टीआरपी और व्यूज़ बटोरने के लिए बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी की भी छवि को सोशल मीडिया पर दागदार करने से पीछे नहीं हटते। अगर अदालत इस मामले में कड़ा रुख अपनाती है, तो यह साइबर स्पेस में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ी नज़ीर बन सकता है।