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NCERT की पाठ्यपुस्तकों पर राजनीतिक बवाल: विपक्ष का गंभीर आरोप- शिक्षा का भगवाकरण कर रही सरकार, ‘RSS का एजेंडा’ थोपने की कोशिश

द इंडियन व्यू टीम
नई दिल्ली

भारत की स्कूली शिक्षा और इतिहास के पाठ्यक्रम को लेकर एक बार फिर भारी राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। देश के विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एजेंडा’ (pushing RSS agenda) देश के नौनिहालों पर थोप रही है। यह विवाद तब और गहरा गया जब नई किताबों को तैयार करने वाली समिति के सदस्यों के नाम सार्वजनिक हुए।

विपक्ष के अनुसार, कक्षा 11 और 12 के लिए राजनीति विज्ञान (political science) की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने का जिम्मा जिस 16-सदस्यीय टीम (16-member textbook development team) को सौंपा गया है, उसमें संघ (Sangh) और उसके अनुषंगी संगठनों से जुड़े कई लोगों को शामिल किया गया है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की वैचारिक नियुक्तियां न केवल शिक्षा की तटस्थता को खत्म करती हैं, बल्कि यह देश के धर्मनिरपेक्ष और बहुलवादी ताने-बाने पर भी सीधा प्रहार है।

दूसरी ओर, NCERT ने अपने इस कदम का बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि पाठ्यपुस्तक विकास दल का पुनर्गठन एक नए और व्यापक जनादेश (mandate) के साथ किया गया है। इस नए पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा में “सांस्कृतिक जुड़ाव” (cultural rootedness) पैदा करना, “भारतीय ज्ञान प्रणालियों” (Indian knowledge systems) को बढ़ावा देना और छात्रों को उनकी जड़ों से परिचित कराना है।

शिक्षाविदों का एक वर्ग इस बदलाव को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और भारतीय संदर्भ में शिक्षा को ढालने के एक आवश्यक कदम के रूप में देख रहा है। लेकिन आलोचकों का मानना है कि ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ के नाम पर इतिहास और राजनीति विज्ञान की किताबों से उन तथ्यों को हटाया जा रहा है जो एक विशेष विचारधारा के अनुकूल नहीं हैं। शिक्षा में वैचारिकता की यह टकराहट न केवल संसद में, बल्कि देश भर के शिक्षा जगत में एक गहरी बहस का विषय बन चुकी है, जहां एक पक्ष इसे ‘संस्कृति की वापसी’ बता रहा है, तो दूसरा इसे ‘शिक्षा का भगवाकरण’ करार दे रहा है।