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जम्मू-कश्मीर में ‘डिजिटल जनगणना’ की राह में तकनीकी बाधा: 8GB रैम वाले स्मार्टफोन की अनिवार्यता ने प्रगणकों की बढ़ाई चिंता, प्रशासन कर रहा समाधान की तलाश

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
नई दिल्ली / डोडा

भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में अगली जनगणना पूरी तरह से ‘डिजिटल’ होने जा रही है, लेकिन इस तकनीकी बदलाव ने ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के सामने कुछ अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जम्मू-कश्मीर (J&K) में आगामी ‘जनगणना-2027’ (Census-2027) की तैयारियों को लेकर आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में यह बात सामने आई है कि जनगणना प्रगणकों (Census enumerators) के बीच 8 जीबी रैम (8 GB RAM) वाले स्मार्टफोन की अनिवार्यता को लेकर भारी चिंता बनी हुई है।

यह अहम मुद्दा 20 अगस्त 2026 को डोडा (Doda) ज़िले में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान गरमाया। इस बैठक की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी (Chief Principal Census Officer – CPCO) एवं निदेशक, अमित शर्मा (Amit Sharma) ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य डोडा और आसपास के ज़िलों में डिजिटल जनगणना की ज़मीनी तैयारियों का जायज़ा लेना था।

नए डिजिटल प्रोटोकॉल के अनुसार, जनगणना का पूरा डेटा एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से एकत्र और सिंक किया जाएगा। इस ऐप के सुचारू रूप से काम करने, भारी डेटा को स्टोर करने और सर्वर तक बिना रुके ट्रांसमिट करने के लिए उच्च क्षमता वाले डिवाइस की आवश्यकता है, जिसके लिए न्यूनतम ‘8 जीबी रैम’ का मानक तय किया गया है। समस्या यह है कि अधिकांश सरकारी शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पटवारियों (जिन्हें प्रगणक के रूप में तैनात किया जाता है) के पास मौजूद व्यक्तिगत स्मार्टफोन इस उच्च तकनीकी मानक को पूरा नहीं करते हैं।

बैठक में उपस्थित स्थानीय अधिकारियों और प्रगणकों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के लिए अपनी जेब से नए और महंगे स्मार्टफोन खरीदना संभव नहीं है। अधिकारी अमित शर्मा ने इस ‘उचित समाधान’ (appropriate resolution) की आवश्यकता को गंभीरता से सुना। प्रशासन अब इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या प्रगणकों को सरकार की ओर से विशेष टैबलेट या उच्च क्षमता वाले डिवाइस मुहैया कराए जाएं, या फिर उनके मौजूदा उपकरणों में कोई तकनीकी अपग्रेडेशन किया जा सकता है। यह मुद्दा केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत पूरे देश में इतने बड़े पैमाने पर डेटा एकत्रीकरण की व्यावहारिक चुनौतियों को उजागर करता है।