साइबर क्राइम पर मुंबई पुलिस का बड़ा प्रहार: 25.45 करोड़ रुपये के ‘म्यूल’ अकाउंट सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, तीन एजेंट गिरफ्तार

अभिषेक सिंह
मुंबई
डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर नकेल कसने के लिए मुंबई पुलिस को एक बड़ी और अहम कामयाबी हाथ लगी है। मुंबई पुलिस ने एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय गिरोह (interstate racket) का भंडाफोड़ किया है, जो साइबर अपराधियों को धोखाधड़ी के पैसे छिपाने के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ (mule accounts) या किराए के बैंक खाते मुहैया कराता था। पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस सिंडिकेट ने अब तक 25.45 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम देने में जालसाज़ों की मदद की है।
गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को डोंगरी पुलिस स्टेशन (Dongri Police Station) की विशेष टीम ने इस गिरोह के तीन मुख्य एजेंटों को धर दबोचा। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए ये तीनों एजेंट मूल रूप से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रहने वाले हैं। इन शातिर अपराधियों का मुख्य काम गरीब, मज़दूर और कम पढ़े-लिखे लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाना था। इसके बाद, ये एजेंट इन खातों के डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड का एक ‘म्यूल अकाउंट किट’ (mule account kits) तैयार करते थे और उसे भारी कीमत पर साइबर ठगों को बेच देते थे।
‘म्यूल अकाउंट’ साइबर अपराध की दुनिया का सबसे अहम हथियार है। जब कोई साइबर ठग किसी निर्दोष व्यक्ति को अपने जाल में फंसाकर पैसे ऐंठता है, तो वह रकम सीधे उसके अपने खाते में नहीं जाती, बल्कि इन्हीं किराए के ‘म्यूल खातों’ में ट्रांसफर की जाती है। इसके बाद इन पैसों को तुरंत निकालकर या क्रिप्टो करेंसी में बदलकर गायब कर दिया जाता है, जिससे पुलिस के लिए असली अपराधी तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।
मुंबई पुलिस द्वारा ज़ब्त किए गए सामानों की प्रदर्शनी में भारी मात्रा में मोबाइल फोन, दर्जनों एटीएम कार्ड, पासबुक और फर्जी दस्तावेज़ देखे जा सकते हैं। यह कार्रवाई इस बात का सख्त संदेश है कि पुलिस अब केवल ठगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बैंकिंग लॉजिस्टिक मुहैया कराने वाले पूरे ‘सप्लाई चेन’ को नेस्तनाबूद कर रही है। आम जनता के लिए भी यह एक कड़ी चेतावनी है कि वे कभी भी चंद पैसों के लालच में अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें, अन्यथा वे अनजाने में ही किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का हिस्सा बन सकते हैं और उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है।