श्रमिक सुरक्षा कमजोर होने का खतरा’: सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, जानिए पूरा मामला

New Delhi : औद्योगिक संबंधों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर कांग्रेस ने गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी का कहना है कि ‘उद्योग’ की परिभाषा को संकीर्ण करने से श्रमिकों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण का दायरा प्रभावित हो सकता है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने दावा किया है कि इस तरह के बदलावों से देश के मेहनतकश वर्ग के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय कमजोर हो सकते हैं।कांग्रेस ने उठाए क्या सवाल और क्या दी दलीलें?कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर सवाल खड़े किए जिसमें कहा गया है कि ‘उद्योग’ शब्द की 1978 में दी गई श्रमिक हितैषी व्याख्या औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत नए मामलों पर लागू नहीं होगी। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 1978 में स्थापित व्यवस्था ने लंबे समय तक यह तय करने में मदद की थी कि किन गतिविधियों और कर्मचारियों पर श्रम कानून लागू होंगे। उन्होंने कहा कि कानून को ‘उद्योग’ की व्यापक परिभाषा से सीमित करने या उससे अलग करने की कोई भी कोशिश श्रमिकों के संरक्षण को कमजोर कर सकती है।1978 के ट्रिपल टेस्ट और श्रम कानूनों का महत्वजयराम रमेश ने जिक्र किया कि 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की बहुमत वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम जय बीर सिंह मामले में अपने 1978 के फैसले में तय ‘ट्रिपल टेस्ट’ को नए सिरे से परिभाषित करने की परिकल्पना की है। यह ट्रिपल टेस्ट फरवरी 1978 के बंगलूरू वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा मामले में तय किया गया था। ‘उद्योग’ की व्याख्या का सीधा संबंध इस बात से है कि कौन ‘कामगार’ माना जाएगा और किसे श्रम कानूनों का संरक्षण मिलेगा। 1978 के मामले में व्यवस्थित गतिविधि, नियोक्ता-कर्मचारी सहयोग तथा वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन जैसे तत्व तय किए गए थे, जिसमें पूरी तरह आध्यात्मिक या धार्मिक सेवाओं को बाहर रखा गया था।सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस को क्यों है आपत्ति?रमेश का तर्क है कि 2026 के बहुमत वाले फैसले ने इस व्यवस्था को सीमित कर दिया है, जिसके तहत किसी गतिविधि में व्यापार या कारोबार जैसी स्पष्ट व्यावसायिक प्रकृति होना जरूरी माना गया है। इसके अलावा, संप्रभु कार्यों के अपवाद का दायरा भी बढ़ाया गया है, जिससे सरकार की कई गतिविधियां इस दायरे से बाहर हो सकती हैं। कांग्रेस का मानना है कि इससे श्रम अदालतों और औद्योगिक न्यायाधिकरणों के सामने मुकदमों और अनिश्चितता का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे खुले बाजार और निजी सेवा व्यवस्था में श्रमिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।न्यायमूर्ति नागरत्ना के असहमति वाले फैसले की सराहनाकांग्रेस नेता ने न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना के असहमति वाले फैसले को साहसिक, स्पष्ट और प्रभावी बताया है। उन्होंने कहा कि बंगलूरू वाटर सप्लाई मामले में तय ट्रिपल टेस्ट पर दोबारा विचार करने की कोई जरूरत नहीं थी और न्यायिक निश्चितता के हित में स्थापित कानून को बदलने से बचना चाहिए था। पार्टी का मानना है कि ऐसे समय में जब औद्योगिक शांति के लिए स्पष्टता जरूरी है, श्रम संबंधों में अनिश्चितता बढ़ना चिंता का विषय है।