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दिल्ली में स्वाइन फ्लू का बढ़ा प्रकोप: H1N1 के 1770 के पार पहुंचे मामले, तेज बुखार और खांसी को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

New Delhi : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून के मौसम के बीच मौसमी बीमारियों और स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों में अचानक भारी उछाल देखने को मिला है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 1,770 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमण की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने हाई-लेवल बैठक कर हालात की समीक्षा की है और अस्पतालों को पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।महज कुछ ही हफ्तों में दोगुने से ज्यादा हुए मामलेस्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में एच1एन1 संक्रमण बेहद तेजी से फैल रहा है। स्थिति यह है कि शहर में एक ही दिन के भीतर 114 नए मरीज मिलने से हड़कंप मच गया, जिसके बाद इस साल कुल मामलों का आंकड़ा बढ़कर 1,777 पर पहुंच गया है। पिछले महीने यानी 6 अगस्त तक दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1,344 मामले दर्ज किए गए थे, जिसका मतलब है कि महज दो हफ्ते के भीतर ही 433 से ज्यादा नए मरीज सामने आ गए हैं। पिछले साल इसी अवधि की तुलना करें तो इस वर्ष मरीजों की संख्या में करीब आठ गुना तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो एक गंभीर चेतावनी है।स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रशासन अलर्ट पर, अस्पतालों में अलग वार्ड तैयारबढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार संक्रमण के पैटर्न, प्रभावित इलाकों और संभावित हॉटस्पॉट पर पैनी नजर रख रही है। सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्था रखें। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए विशेष और अलग वार्ड तैयार किए जा रहे हैं।किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा और क्या हैं लक्षण?विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव और उमस के कारण इन्फ्लूएंजा वायरस तेजी से पनपता है। सर गंगा राम अस्पताल के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. ऋषिकेश देसाई और अन्य संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ लोग तो इस संक्रमण से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ खास वर्गों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है:बुजुर्ग और छोटे बच्चेगर्भवती महिलाएंपहले से फेफड़े, हृदय, या डायबिटीज (मधुमेह) जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजप्रमुख लक्षण: स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, लंबे समय तक रहने वाली खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और अत्यधिक थकान शामिल हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि यदि ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और स्व-चिकित्सा (Self-Medication) से बचें।बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियांसंक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आरएमएल अस्पताल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमेश मीणा ने कुछ महत्वपूर्ण बचाव के उपाय सुझाए हैं:हाथों की नियमित रूप से साबुन या सैनिटाइज़र से सफाई करें।यदि आप बीमार हैं, तो घर पर ही आराम करें और सार्वजनिक आयोजनों या भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या टिशू पेपर से ढकें।डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर फ्लू का टीकाकरण (Vaccination) भी कराया जा सकता है।