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‘चवन्नी से रुपया’ बयान पर गरमाई यूपी की राजनीति: मायावती का अखिलेश पर तीखा हमला, बोलीं- पूरे जाट समाज से मांगें माफी

Lucknow : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा जुबानी हमला बोला है। मायावती ने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और उसके नेतृत्व को लेकर अखिलेश यादव द्वारा दिए गए ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान को बेहद अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक करार दिया है। बसपा प्रमुख ने मांग की है कि इस अपमानजनक बयान के लिए सपा नेतृत्व को तुरंत रालोद, उसके नेता, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार और पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।सपा की संकीर्ण और जातिवादी राजनीति पर साधा निशानासोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए सपा पर कड़े प्रहार करते हुए मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी का रवैया हमेशा से अपने विरोधी दलों के साथ-साथ सहयोगी दलों के प्रति भी बेहद संकीर्ण और जातिवादी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के इसी अहंकार और स्वार्थी राजनीतिक रवैये के कारण कई मौकों पर देश और प्रदेश की धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुई हैं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा शैली और बयानबाजी किसी भी मुख्यधारा के राजनीतिक दल के प्रमुख को शोभा नहीं देती।गेस्ट हाउस कांड और 2019 के गठबंधन टूटने का किया जिक्रअपने पुराने राजनीतिक अनुभवों को साझा करते हुए बसपा प्रमुख ने साल 1993 के सपा-बसपा गठबंधन और उसके बाद के घटनाक्रमों को याद किया। उन्होंने 2 जून 1995 के कुख्यात ‘लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड’ का जिक्र करते हुए इसे अपने खिलाफ रचे गए एक खतरनाक राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। इसके अलावा, उन्होंने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में हुए सपा-बसपा गठबंधन का भी हवाला दिया और कहा कि चुनाव परिणाम आते ही गठबंधन का टूटना पूरी तरह से सपा के अहंकारी और स्वार्थी स्वभाव का परिणाम था, जिसके बाद उन्होंने भविष्य में कभी भी सपा के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया था।पीडीए की राजनीति पर सवाल और जनता से अपीलअखिलेश यादव द्वारा लगातार उठाए जा रहे ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर भी मायावती ने करारा तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपने राजनीतिक और चुनावी स्वार्थ के अनुसार पीडीए के अर्थ और उसकी परिभाषा बदलती रहती है। इसके साथ ही उन्होंने सपा के पिछले शासनकाल को याद करते हुए दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज (विशेषकर ब्राह्मणों) के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मायावती ने उत्तर प्रदेश की जनता से आगामी विधानसभा चुनावों में सपा की कथित संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से पूरी तरह सावधान रहने तथा उन्हें सत्ता से दूर रखने की अपील की है।