जादवपुर विश्वविद्यालय हिंसा: भाजपा विधायक ने नकारे आरोप, कहा- ‘ABVP से पार्टी का कभी कोई सीधा संबंध नहीं रहा’

विवेक ओझा
कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) एक बार फिर वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र गुटों के बीच भारी हिंसक झड़प का अखाड़ा बन गया है। इस पूरे बवाल के बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खुद को इस छात्र संघर्ष से पूरी तरह अलग करने की कोशिश की है। जादवपुर से भाजपा विधायक शर्बरी मुखर्जी ने विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा में अपनी पार्टी की किसी भी प्रकार की संलिप्तता से साफ इनकार किया है।
विधायक शर्बरी मुखर्जी ने मीडिया से बात करते हुए एक बेहद अहम और राजनीतिक रूप से सुरक्षित बयान दिया कि भारतीय जनता पार्टी का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ ‘कभी कोई सीधा संबंध नहीं रहा है’ (never been associated with ABVP)। उन्होंने स्पष्ट किया कि ABVP एक स्वतंत्र छात्र संगठन है और उसके द्वारा किए जा रहे किसी भी प्रदर्शन या कैंपस गतिविधियों के लिए भाजपा को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हिंसा के कारणों पर टिप्पणी करते हुए भाजपा नेता ने वामपंथी छात्र संगठनों—स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और रेडिकल स्टूडेंट्स फोरम (RSF)—पर गंभीर आरोप लगाए। मुखर्जी ने दावा किया कि इन वामपंथी (Left-leaning) गुटों ने जानबूझकर ABVP समर्थकों को उकसाया (instigated) और उन्हें कैंपस में प्रवेश करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने बताया कि यह तनाव तब भड़का जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र इकाई के एक सदस्य पर जानलेवा हमला किया गया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
जादवपुर विश्वविद्यालय हमेशा से वामपंथी छात्र राजनीति का एक अभेद्य गढ़ रहा है, जहां दक्षिणपंथी समूहों का प्रवेश अक्सर हिंसक रूप ले लेता है। भाजपा विधायक का यह बयान एक ओर जहां वामपंथी संगठनों की कथित ‘हिंसक कार्यप्रणाली’ को उजागर करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह भाजपा को किसी भी ‘कैंपस वेंडलिज़्म’ (कैंपस में तोड़फोड़) के आरोपों से कानूनी और राजनीतिक तौर पर बचाने की एक रणनीतिक ढाल भी है। बहरहाल, इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और छात्रों में असुरक्षा की भावना पनप गई है।