हिंसा की आग में झुलसा जादवपुर विश्वविद्यालय: ABVP और SFI समर्थकों के बीच खूनी संघर्ष, लाठी-डंडों से लैस होकर घुसे प्रदर्शनकारी

सरिता त्रिपाठी
कोलकाता
पश्चिम बंगाल का प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) लगातार दूसरे दिन भारी तनाव और खूनी संघर्ष की चपेट में है। विश्वविद्यालय का परिसर युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया है, जहाँ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के समर्थकों के बीच ज़बरदस्त हिंसक झड़पें हुई हैं।
हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि ABVP समर्थकों ने लगातार दूसरे दिन विश्वविद्यालय परिसर के भीतर ज़बरन घुसने (storm inside) की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल हो रहे वीडियो फुटेज के अनुसार, लाठी और डंडों (sticks and batons) से लैस प्रदर्शनकारियों की एक उग्र भीड़ ने कैंपस के गेट पर धावा बोल दिया। इस दौरान उन्होंने वाम-समर्थित छात्रों (Left-backed students) के पोस्टरों और बैनरों को फाड़ दिया और कैंपस के मुख्य द्वारों पर आगजनी (set them on fire) की घटना को अंजाम दिया।
इस बीच, स्थानीय जादवपुर की भाजपा विधायक ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को “नक्सलियों, माओवादियों और राष्ट्र-विरोधियों” (naxals, maoists and anti-nationals) का सुरक्षित पनाहगाह नहीं बनने दिया जाएगा। यह बयान सीधे तौर पर कैंपस में सक्रिय वामपंथी और अति-वामपंथी छात्र गुटों पर निशाना है, जो दशकों से जादवपुर विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति पर हावी रहे हैं।
पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। कैंपस के बाहर और भीतर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। यह हिंसक झड़प इस बात का संकेत है कि राज्य में छात्र राजनीति अब केवल वैचारिक बहसों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह बाहुबल और वर्चस्व की लड़ाई में बदल चुकी है। इस लगातार हो रही हिंसा से न केवल विश्वविद्यालय का शैक्षणिक कैलेंडर पटरी से उतर गया है, बल्कि आम छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरी दहशत बैठ गई है। प्रशासन अब दोनों गुटों के उग्र नेताओं की पहचान कर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है, लेकिन परिसर में शांति की बहाली फिलहाल एक दूर की कौड़ी नज़र आ रही है।