NCERT पाठ्यक्रम विवाद पर समिति प्रमुख का बड़ा बयान: ‘छात्रों को मिलेंगी पूरी तरह तथ्यपरक और निष्पक्ष किताबें’, राजनीतिक जुड़ाव के आरोपों को किया खारिज

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली
स्कूली शिक्षा और विशेषकर इतिहास व राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम को लेकर देश में चल रहे भारी विवाद के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की नवगठित समिति के प्रमुख ने एक बड़ा बयान जारी किया है। समिति प्रमुख ने आम जनता, अभिभावकों और विपक्ष को आश्वस्त किया है कि नई शिक्षा नीति के तहत तैयार की जा रही पाठ्यपुस्तकें पूरी तरह से तथ्यपरक (factual) और निष्पक्ष (unbiased) होंगी।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब कक्षा 11 और 12 के लिए ‘राजनीति विज्ञान’ (political science) की पाठ्यपुस्तकें विकसित करने वाली समिति के पुनर्गठन (reconstitution) को लेकर एक बड़ा राष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया था। देश के कई प्रमुख विपक्षी दलों और वामपंथी शिक्षाविदों ने आरोप लगाया था कि नए पैनल में शामिल कई सदस्यों के ‘राजनीतिक और दक्षिणपंथी संगठनों से कथित संबंध’ (reported political links) हैं। आलोचकों का तर्क था कि इन नियुक्तियों के ज़रिए केंद्र सरकार शिक्षा का वैचारिक भगवाकरण कर रही है और छात्रों पर एक विशेष विचारधारा थोपने का प्रयास कर रही है।
इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए, समिति प्रमुख ने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम विकास की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी, वैज्ञानिक और अकादमिक कठोरता (academic rigor) पर आधारित है। उन्होंने कहा कि समिति का एकमात्र उद्देश्य छात्रों को भारतीय परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ वैश्विक यथार्थ का सही ज्ञान देना है। किताबों में शामिल किए जाने वाले हर तथ्य को कई स्तरों पर जांचा और परखा जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार का राजनीतिक या वैचारिक झुकाव उसमें नज़र न आए।
शिक्षा के क्षेत्र में यह विवाद कोई नया नहीं है। जब भी सत्ता परिवर्तन होता है, पाठ्यपुस्तकों में बदलाव एक गर्म मुद्दा बन जाता है। हालांकि, NCERT भारत की सबसे प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्था है और इसकी किताबों पर करोड़ों छात्रों का भविष्य निर्भर करता है। समिति प्रमुख का यह वादा कि किताबें “तथ्यपरक और निष्पक्ष” होंगी, विवादों को शांत करने का एक सकारात्मक प्रयास है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब ये किताबें छपकर बाज़ार में आएंगी और शिक्षाविदों द्वारा इनका स्वतंत्र और विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।