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मिनी नंदिनी योजना: अयोध्या में 6 नई डेयरियां खोलने की प्रक्रिया तेज, 50% अनुदान के साथ महिलाओं को मिलेगा बड़ा मौका

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
अयोध्या/उत्तर प्रदेश: रामनगरी अयोध्या में दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाई पर ले जाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना’ (Mini Nandini Yojana) के तहत अयोध्या में कुल 42 नई मिनी डेयरियां खोलने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 36 डेयरियों के लिए लाभार्थियों का चयन पूरा हो चुका है, जबकि शेष 6 डेयरियों के लिए चयन प्रक्रिया जोरों पर है।

महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें मातृशक्ति को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन डेयरियों के संचालन में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है। इसका सीधा अर्थ है कि अयोध्या की महिलाएं अब केवल घर तक सीमित न रहकर डेयरी उद्योग के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनेंगी।

6 डेयरियों के लिए 234 दावेदार!
योजना की लोकप्रियता और लोगों के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बची हुई मात्र 6 डेयरियों के लिए 234 लोगों ने आवेदन किया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और संबंधित विभागों द्वारा इन आवेदनों की छंटनी और सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। यदि पात्र लाभार्थियों की संख्या अधिक होती है, तो निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ई-लॉटरी (E-Lottery) के माध्यम से अंतिम 6 लोगों का चयन किया जाएगा।

कितना मिलेगा अनुदान और क्या है लागत?
‘मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना’ के तहत 10 स्वदेशी गायों की एक डेयरी यूनिट स्थापित की जाती है।

  • एक डेयरी की कुल अनुमानित परियोजना लागत लगभग 23 लाख 60 हजार रुपये (23.60 लाख) आती है।
  • राज्य सरकार इस लागत पर 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 11 लाख 80 हजार रुपये (11.80 लाख) तक की भारी सब्सिडी (अनुदान) दे रही है।
  • इस वित्तीय मॉडल के तहत, लाभार्थी को अपनी जेब से केवल 15 प्रतिशत हिस्सा लगाना होता है, 35 प्रतिशत पूंजी बैंक से लोन के रूप में मिल जाती है और बाकी 50 प्रतिशत अनुदान सरकार द्वारा दो किस्तों में दिया जाता है।

केवल स्वदेशी नस्ल की गायों को बढ़ावा
इस योजना का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य भारत की विलुप्त होती स्वदेशी गौ-नस्लों का संवर्धन करना है। इसलिए, योजना के तहत सिर्फ साहीवाल, गिर और थारपारकर जैसी उच्च दुग्ध क्षमता वाली देसी गायों को पालने की ही अनुमति है। सरकार द्वारा गायों की खरीद, उनके रखरखाव और प्रशिक्षण के लिए भी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

अयोध्या को क्या होगा फायदा?
अयोध्या में पर्यटन और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण शुद्ध दूध और डेयरी उत्पादों की मांग में भारी उछाल आया है। इन 42 मिनी नंदिनी डेयरियों के चालू होने से स्थानीय स्तर पर दूध की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे न केवल मिलावटखोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों की आय में भी जबरदस्त वृद्धि होगी और ग्रामीण युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।