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केन-बेतवा परियोजना: विस्थापित परिवारों का दर्द सुनने उनके दरवाज़े पर जाएंगे अधिकारी, एमपी के सीएम मोहन यादव का सख्त निर्देश

सरिता त्रिपाठी
भोपाल / पन्ना

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने महत्वाकांक्षी ‘केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना’ (Ken-Betwa project) से विस्थापित और प्रभावित होने वाले परिवारों के पुनर्वास को लेकर एक बेहद संवेदनशील और सख्त प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि विस्थापन का दर्द झेल रहे ग्रामीणों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री यादव ने पन्ना (Panna) और छतरपुर (Chhatarpur) ज़िला प्रशासन को कड़ाई से निर्देशित किया है कि वरिष्ठ अधिकारी परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों के हर एक घर (every household in the affected villages) का व्यक्तिगत रूप से दौरा करें। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं बनाने के बजाय, विस्थापित हो रहे परिवारों की वास्तविक स्थिति (actual situation) और उनकी ज़मीनी समस्याओं (problems of the families) को करीब से समझना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि वे प्रभावित लोगों की शिकायतों (grievances) को सहानुभूतिपूर्वक सुनें। केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी पहुंचाना है। लेकिन इसके कारण पन्ना टाइगर रिज़र्व और आसपास के कई गांवों का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाएगा।

ऐसे में हज़ारों परिवारों को अपना पुश्तैनी घर और ज़मीन छोड़नी पड़ रही है। अक्सर देखा गया है कि बड़ी परियोजनाओं में विस्थापितों को मुआवज़ा और पुनर्वास मिलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री का यह निर्देश इस बात की गारंटी सुनिश्चित करने का प्रयास है कि ज़मीन के बदले लोगों को उचित सम्मान, पारदर्शी मुआवज़ा और बेहतर पुनर्वास सुविधाएं मिलें ताकि उनके जीवन स्तर में कोई गिरावट न आए।