सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन में नया मील का पत्थर! मेरठ में बनेगा देश का पहला ड्रोन और मानव रहित विमान रनवे, टेंडर प्रक्रिया शुरू

विवेक ओझा
मेरठ/उत्तर प्रदेश: आधुनिक तकनीक और रक्षा क्षेत्र में भारत एक और बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में देश का पहला समर्पित ‘ड्रोन और मानव रहित विमान (UAV/RPA)’ रनवे बनने जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल भारतीय सेना की निगरानी और सामरिक शक्ति को बढ़ाएगी, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी एक जीवन रक्षक प्रणाली के रूप में काम करेगी। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस परियोजना का खाका तैयार कर टेंडर जारी कर दिया है।
क्या है यह प्रोजेक्ट और कितनी होगी लागत?
यह रनवे सामान्य हवाई पट्टियों से बिल्कुल अलग होगा, क्योंकि इसे विशेष रूप से ड्रोन (Drones) और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (Remotely Piloted Aircraft – RPA) के संचालन, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
- यह अत्याधुनिक रनवे मेरठ के किला रोड पर करीब 900 एकड़ की विशाल भूमि पर विकसित किया जाएगा।
- रनवे की कुल लंबाई 2,110 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी।
- रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले सीमा सड़क संगठन (BRO) के ‘प्रोजेक्ट शिवालिक’ द्वारा इस पर अनुमानित 406 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
- रनवे को इस तरह से मजबूत बनाया जाएगा कि इस पर भारी ड्रोन के साथ-साथ C-295 और C-130 जैसे मध्यम श्रेणी के परिवहन विमान भी आसानी से लैंड कर सकें।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिली प्रेरणा
विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की सफलता ने इस प्रोजेक्ट की नींव रखी। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले के बाद चलाए गए इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पहली बार सटीक निगरानी और लक्ष्य को भेदने के लिए मानव रहित विमानों (ड्रोन) का बड़े पैमाने पर और बेहद सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया था। इसके बाद ही सरकार ने महसूस किया कि भविष्य के युद्धों और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक अलग ‘ड्रोन बेस’ का होना नितांत आवश्यक है।
आपदा प्रबंधन में कैसे होगी मदद?
यह रनवे केवल सैन्य गतिविधियों तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) में मिलेगा। बाढ़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय जब दूरदराज के इलाकों में सड़क या संचार संपर्क टूट जाता है, तब इस बेस से हाई-टेक ड्रोन भेजकर:
- प्रभावित क्षेत्रों की तुरंत और सटीक निगरानी की जा सकेगी।
- फंसे हुए लोगों को खोजने (Search and Rescue) में मदद मिलेगी।
- दुर्गम इलाकों में भोजन, दवाइयां और अन्य राहत सामग्री तेजी से पहुंचाई जा सकेगी।
मेरठ को ही क्यों चुना गया?
मेरठ की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक दृष्टि से बेहद अनुकूल है। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित है और दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ सेना की पश्चिमी कमान के बहुत करीब है। यहां से सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों तक ड्रोन की पहुंच आसान और तेज होगी। साथ ही, आपात स्थिति में दिल्ली से लॉजिस्टिक और तकनीकी सहायता भी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।
मेरठ का यह 406 करोड़ रुपये का ‘ड्रोन रनवे प्रोजेक्ट’ रक्षा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह बेस न केवल सीमाओं पर चौकसी बढ़ाएगा, बल्कि आपदा के समय देवदूत बनकर लोगों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।