अखिलेश यादव के ’25 पैसे’ और ‘ABCD’ वाले बयान पर मचा सियासी घमासान: जयंत चौधरी ने जताया कड़ा ऐतराज, मायावती ने मांगी माफी

अभिषेक सिंह
लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर एक बार फिर सियासी भूचाल ला रहे हैं। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा की गई एक कथित टिप्पणी ने राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को बुरी तरह से भड़का दिया है। अखिलेश यादव के ’25 पैसे’ और एक विशेष समुदाय को ‘ABCD सिखाने’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसने प्रदेश के राजनीतिक और जातीय समीकरणों में गरमाहट ला दी है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब अखिलेश यादव ने कथित तौर पर रालोद और जाट समुदाय की ओर इशारा करते हुए कुछ तल्ख टिप्पणियां कीं। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए रालोद प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने करारा पलटवार किया। जयंत चौधरी ने कहा, “अगर आपको राजनीतिक लड़ाई में कुछ हल्के शब्दों का इस्तेमाल करना ही था, तो आप मेरा नाम लेकर कह सकते थे। इसमें कोई समस्या नहीं थी… लेकिन पूरे जाट समुदाय को निशाना बनाना और यह कहना कि ‘हमने उन्हें ABCD सिखाई है’, यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” रालोद का मानना है कि यह बयान न केवल उनके राजनीतिक दल, बल्कि एक पूरे स्वाभिमानी समुदाय का अपमान है।
इस सियासी खींचतान में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती भी कूद पड़ी हैं। बसपा अध्यक्ष ने अखिलेश यादव की इस टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण और अमर्यादित करार देते हुए उनसे तुरंत सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। मायावती का यह रुख दर्शाता है कि वे इस मौके का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी को दलित और किसान विरोधी साबित करने के लिए कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट और किसान वोट बैंक हमेशा से एक निर्णायक भूमिका निभाता आया है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जो रालोद समाजवादी पार्टी का गठबंधन सहयोगी था, वह अब एनडीए (NDA) का हिस्सा है। ऐसे में अखिलेश यादव की यह तल्ख़ी उस पुरानी राजनीतिक खटास का ही परिणाम मानी जा रही है। हालांकि, किसी पूरे समुदाय पर कटाक्ष करना समाजवादी पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है। यह बयानबाज़ी आने वाले विधानसभा उपचुनावों और पंचायत चुनावों में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की पूरी संभावना है, जहाँ विपक्ष इसे सपा के ‘अहंकार’ के रूप में पेश करेगा।