कर्नाटक चुनाव आयोग का बड़ा कदम: 1.07 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से कटने की तैयारी, बेंगलुरु के आंकड़ों में भारी गिरावट

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
बेंगलुरु
कर्नाटक में लोकतांत्रिक भागीदारी और चुनावी पारदर्शिता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आ रहा है, जो राज्य के चुनावी समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। कर्नाटक में 24 अगस्त को मतदाता सूची का नया मसौदा (Draft electoral rolls) प्रकाशित किया जाना है, और इसके तहत 1.07 करोड़ से अधिक मतदाताओं को सूची से बाहर (excluded) किए जाने की तैयारी है।
मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण चुनाव आयोग की एक सतत प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मृत मतदाताओं, दोहरे पंजीकरण वाले नामों या विस्थापित हो चुके लोगों को हटाकर सूची को त्रुटिहीन बनाना होता है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या (एक करोड़ से अधिक) में नामों का काटा जाना अपने आप में एक अभूतपूर्व घटना है।
सबसे अधिक असर राज्य की राजधानी और आईटी हब ‘बेंगलुरु’ पर देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु में जहाँ अब तक मतदाताओं की संख्या 1.03 करोड़ से अधिक थी, वहीं अब इस नए मतदाता सूची मसौदे में यह संख्या सिकुड़कर मात्र 56.11 लाख मतदाताओं तक रह जाएगी। यह 50% के करीब की गिरावट शहरी विस्थापन, जनसांख्यिकीय बदलाव और संभवतः बड़े पैमाने पर हुए फर्जी पंजीकरणों को उजागर करती है।
विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस भारी छंटनी पर अपनी चिंताएं व्यक्त करना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में नामों को हटाने की प्रक्रिया में कई वास्तविक और वैध मतदाताओं के नाम भी काटे जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक ‘मसौदा’ है, और नागरिकों को सूची की समीक्षा करने तथा अपनी आपत्तियां या दावे प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। राजनीतिक रूप से यह कदम काफी अहम है, क्योंकि मतदाता सूची का यह नया स्वरूप आगामी स्थानीय निकायों और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की रणनीति को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।