Trending

‘जंतर-मंतर पर समर्थन, कर्नाटक में FIR’: छात्र नेता नेहा बोरा ने कांग्रेस सरकार के दोहरे मापदंडों पर बोला तीखा हमला

द इंडियन व्यू टीम
बेंगलुरु / नई दिल्ली

कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार एक बार फिर नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर घिरती नज़र आ रही है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा (Neha Bora) ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उस पर राजनीतिक दोहरेपन का गंभीर आरोप लगाया है।

यह राजनीतिक विवाद उन छात्रों के खिलाफ कर्नाटक में एफआईआर (FIRs) दर्ज किए जाने से उपजा है, जो उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की रिहाई की मांग कर रहे थे। उमर खालिद और शरजील इमाम को कड़े आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जेल में रखा गया है और छात्र संगठन लंबे समय से उनकी रिहाई के लिए देश भर में अभियान चला रहे हैं।

नेहा बोरा ने कांग्रेस के वैचारिक विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, तो कांग्रेस ने उनके साथ पूरी एकजुटता (solidarity) दिखाई थी, लेकिन अपनी ही सत्ता वाले कर्नाटक में उसने छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी। छात्र नेता का तर्क है कि जब कांग्रेस विपक्ष में होती है तो वह असहमति के अधिकार की सबसे बड़ी पैरोकार बन जाती है, लेकिन जब वह सत्ता में आती है तो उसी पुलिसिया तंत्र का इस्तेमाल कर छात्रों की आवाज़ को दबाने का प्रयास करती है।

यह विवाद छात्र राजनीति और सत्ता के बीच के पुराने टकराव को एक बार फिर हवा दे रहा है। कर्नाटक में दर्ज की गई इन एफआईआर ने कई उदारवादी और मानवाधिकार संगठनों को निराश किया है, जो उम्मीद कर रहे थे कि कांग्रेस सरकार कैंपस में असहमति के प्रति अधिक सहिष्णु रवैया अपनाएगी। यह राजनीतिक बहस अब राष्ट्रीय स्तर पर ज़ोर पकड़ रही है कि क्या राजनीतिक दल छात्रों का उपयोग केवल अपनी सुविधानुसार ही करते हैं।