कूटनीतिक हलचल तेज़: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले अजीत डोभाल का बीजिंग दौरा, क्या 7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग?

विवेक ओझा
नई दिल्ली / बीजिंग
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत-चीन संबंधों के लिहाज़ से अगले कुछ सप्ताह बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। भारत द्वारा आगामी 12 सितंबर को ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन’ (BRICS Summit) की मेज़बानी की जानी है। इस अहम वैश्विक आयोजन से कुछ ही सप्ताह पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) बीजिंग (Beijing) के एक बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर जा रहे हैं।
कूटनीतिक जानकारों की नज़रें अजीत डोभाल के इस दौरे पर टिकी हुई हैं। इसे इस बात का एक मज़बूत संकेत (indication) माना जा रहा है कि दोनों पक्ष (भारत और चीन) सात साल में पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) की भारत यात्रा की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं। यदि यह दौरा संपन्न होता है, तो यह कूटनीतिक रूप से एक बहुत बड़ा ‘अर्ली हार्वेस्ट’ (early harvest) यानी प्रारंभिक सफलता मानी जाएगी।
ग़ौरतलब है कि साल 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में भारी तनाव रहा है। हालांकि, सैन्य कमांडरों और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की वार्ताओं के बाद सीमा पर कुछ हद तक तनाव कम करने का प्रयास किया गया है।
एनएसए अजीत डोभाल की यह बीजिंग यात्रा संभवतः दोनों देशों के बीच लंबित सीमा विवादों को शांत करने और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक सफल द्विपक्षीय वार्ता के एजेंडे को अंतिम रूप देने के लिए हो रही है। यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम होगा।