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विवादों के बाद अनंत अंबानी के ‘वनतारा’ चिड़ियाघर का बड़ा फैसला: विदेशी जानवरों के आयात पर लगाई रोक, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली

अनंत अंबानी द्वारा समर्थित और दुनिया के सबसे बड़े प्राणी उद्यानों में शुमार ‘वनतारा’ (Vantara zoo) ने अपनी कार्यप्रणाली में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया है। वनतारा प्रबंधन ने विदेशी जानवरों के आयात को लेकर ‘रीसेट’ (reset) की घोषणा की है और अपनी आयात नीतियों पर पुनर्विचार (rethinks imports) करने का निर्णय लिया है।

चिड़ियाघर के कामकाज में यह बड़ा फेरबदल (overhaul) उन चिंताओं और विवादों के बाद सामने आया है, जो दुनिया भर से जानवरों के तेज़ी से अधिग्रहण (rapid acquisition of animals from around the world) को लेकर पर्यावरणविदों द्वारा उठाए गए थे। इसके साथ ही, संरक्षित प्रजातियों के आयात (imports of protected species) को मंज़ूरी देने की प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए थे।

इन विवादों को शांत करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, वनतारा ने इस महीने ‘वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (CITES) को अपनी “स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएं” (voluntary commitments) प्रस्तुत की हैं।

सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वनतारा प्रबंधन ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय (India’s Supreme Court) में एक आधिकारिक हलफनामा भी दायर किया है। इस हलफनामे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे “जीवित जानवरों के आयात के लिए लंबित सभी आवेदनों को वापस ले रहे हैं।”

वनतारा की इस पहल को वन्यजीव संरक्षणवादियों द्वारा एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह फैसला दर्शाता है कि इतनी बड़ी वन्यजीव परियोजना का प्रबंधन अब वैश्विक संरक्षण संधियों (Conservation Treaties) और कानूनी पारदर्शिता के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठाने का प्रयास कर रहा है, ताकि वन्यजीवों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।