Trending

‘संरचनात्मक मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं’: भारत-चीन संबंधों पर शीर्ष चीनी रणनीतिकार का बयान, कहा- सीमा पर ‘स्थायित्व’ है पहली प्राथमिकता

अभिषेक सिंह
नई दिल्ली / बीजिंग

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में चल रहे लंबे सैन्य गतिरोध और कूटनीतिक वार्ताओं के बीच एक शीर्ष चीनी रणनीतिकार का बेहद अहम बयान सामने आया है। दक्षिण एशिया मामलों के प्रमुख चीनी रणनीतिक मामलों के विद्वान हु शिशेंग (Hu Shisheng) ने भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच ‘संरचनात्मक मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं’ (Structural differences have not disappeared)। यह बयान इस बात का संकेत है कि बीजिंग भी दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच की गहरी दरारों को स्वीकार कर रहा है।

सीमा विवाद के समाधान को लेकर चल रही चर्चाओं पर हु शिशेंग ने एक बहुत ही यथार्थवादी दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर किसी “नाटकीय समझौते” (dramatic settlement) की उम्मीद करने के बजाय, वर्तमान में दोनों देशों का तत्काल ध्यान “स्थिरता को संस्थागत बनाने” (institutionalising stability) पर अधिक होना चाहिए। इसका सीधा अर्थ यह है कि चीन सीमा पर रातों-रात किसी स्थायी समाधान के पक्ष में नहीं है, बल्कि वह मौजूदा स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए नए सैन्य और कूटनीतिक तंत्र विकसित करना चाहता है।

चीनी विद्वान की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) और चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) के बीच कूटनीतिक संवाद का दौर जारी है। 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद से भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा पर पूर्ण शांति और पुरानी स्थिति (Status quo) बहाल नहीं हो जाती, तब तक चीन के साथ व्यापारिक और द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

जानकारों का मानना है कि चीनी थिंक-टैंक का यह बयान बीजिंग की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह भारत को सीमा विवाद और आर्थिक संबंधों को अलग-अलग रखने का संदेश देता रहा है। ‘स्थिरता को संस्थागत’ बनाने का तर्क इस बात की ओर भी इशारा करता है कि चीन लंबी अवधि के लिए सीमा पर अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और भारत को किसी त्वरित समझौते की उम्मीद में नहीं रहना चाहिए। कूटनीतिक मोर्चे पर यह बयान भारत के नीति-निर्माताओं के लिए चीन की भविष्य की चालों को समझने का एक महत्वपूर्ण सुराग है।