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“बैक डोर से आरक्षण खत्म कर रही है मोदी सरकार”: मल्लिकार्जुन खरगे का बड़ा हमला, खाली सरकारी पदों और ठेका प्रथा को बताया साज़िश

विवेक ओझा
नई दिल्ली

देश में रोज़गार और सामाजिक न्याय (Social Justice) के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत सरकार के खिलाफ अपना रुख और भी आक्रामक कर लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने सरकारी विभागों में लाखों पदों के खाली पड़े रहने का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर एक बेहद गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील आरोप लगाया है।

खरगे ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मोदी सरकार “पीछे के दरवाज़े से आरक्षण को खत्म करने की कोशिश कर रही है” (trying to end reservation through the back door)। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने इस दावे के समर्थन में कुछ प्रमुख तर्क पेश किए। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में लाखों स्वीकृत पदों को जानबूझकर ‘खाली’ (vacant) रखा जा रहा है, जिससे आरक्षित श्रेणी (reserved category) के योग्य उम्मीदवारों को उनके संवैधानिक अधिकारों और नौकरी के अवसरों (opportunities) से वंचित होना पड़ रहा है।

इस वैचारिक हमले को आगे बढ़ाते हुए खरगे ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की बिक्री और निजीकरण का मुद्दा भी ज़ोर-शोर से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कंपनियों को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है और जो सरकारी काम बच गए हैं, उनमें ‘संविदा या ठेका रोज़गार’ (contractual employment) को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि इस निजीकरण और ठेका प्रथा के कारण उन नौकरियों की उपलब्धता तेज़ी से सिकुड़ रही है (shrinks the availability of jobs) जो आरक्षण के दायरे (covered by reservation) में आती हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे का यह बयान आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े ‘नैरेटिव’ (विमर्श) को सेट करने का प्रयास है। विपक्ष अब दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों (OBC) के बीच यह संदेश ले जाने की कोशिश कर रहा है कि वर्तमान सरकार उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल यानी ‘आरक्षण’ को कमज़ोर कर रही है। बेरोज़गारी और संविदा नौकरियों के इस दौर में कांग्रेस का यह ‘सामाजिक न्याय’ का कार्ड भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है, जिसका जवाब सरकार को ठोस रोज़गार आंकड़ों के साथ ही देना होगा।